एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत का कोई मंजूर बिल्डिंग प्लान रिकॉर्ड में नहीं मिला है। बेसमेंट का निर्माण भी अनधिकृत बताया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत में करीब दो साल पहले दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन मंजिलों का निर्माण कब हुआ और क्या इसके लिए किसी तरह की अनुमति ली गई थी। इमारत के बेसमेंट में पानी जमा होने और वहां काम चलने की बात भी सामने आई है।
सत्य निकेतन में गिरे मकान का मलवा हटा
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सबसे गंभीर शर्त वह है, जिसमें पीजी प्रशासन को छात्र के साथ होने वाली किसी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया है। फर्नीचर या फिक्स्चर को नुकसान होने पर उसकी भरपाई सिक्योरिटी मनी से करने का प्रावधान भी है। हादसे के बाद ऐसे एकतरफा समझौतों की वैधता और छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।