राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए आयोग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व यूपी की सरकारों को सख्त निर्देश दिए हैं। आयोग ने जिलाधिकारियों, जिला मजिस्ट्रेटों और उपायुक्तों को उनके क्षेत्राधिकार में पराली जलाने से रोकने में विफल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए अधिकृत किया है।
दरअसल, पराली जलाने से निकला धुआं दिल्ली-एनसीआर की हवा को दमघोंटू बनाता है। मानसून की वापसी और तापमान गिरने के साथ इसका असर भी दिखने लगता है। इसे रोकने के लिए आयोग ने बीते साल 10 अक्तूबर के अपने आदेश को और सख्त बना दिया है। बुधवार को जारी नए आदेश में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश व राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों के जिलाधिकारियों और दिल्ली के जिला उपायुक्तों को पराली जलाने पर रोक लगाने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। इसके दायरे में नोडल और पर्यवेक्षी अधिकारी और थानाध्यक्ष (एसएचओ) आएंगे। इस आदेश से साफ है कि अब पराली जलाने वालों के साथ ही उसे रोकने में नाकाम रहने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। आयोग ने पंजाब, हरियाणा व यूपी सरकार को उनकी कार्ययोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पहले ही वैधानिक निर्देश जारी किए हैं।
घटनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग अनिवार्य
इसरो की तरफ से विकसित प्रोटोकॉल के आधार पर उपग्रह डाटा का उपयोग कर आग की घटनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग को अनिवार्य किया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि धान की पराली जलाना पहले से ही निषिद्ध है और इसके उल्लंघन को अधिनियम की धारा-14 के तहत अपराध माना जाएगा।
पंजाब-हरियाणा को कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा
पंजाब और हरियाणा में धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। आयोग ने इन राज्यों से कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। जिला प्रशासन और राज्य सरकारों से अपेक्षा की गई है कि वह पराली जलाने की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी और कठोर जांच बनाए रखें। आयोग ने विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और समीक्षा बैठकों के माध्यम से पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करने की दिशा में प्रतिबद्धता को और मजबूत करने पर बल दिया है।
इसलिए जरूरी है यह कदम
हर साल धान की कटाई के समय, खासकर पंजाब और हरियाणा में किसान फसल के अवशेष जलाते हैं, जिससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण बढ़ जाता है। पराली का धुआं हवा में जहरीले कणों को बढ़ाता है जिससे सांस की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। आयोग ने साफ कहा है कि पराली जलाना पूरी तरह गैरकानूनी है और इसे रोकने के लिए हर स्तर पर कड़ी निगरानी जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई
पराली जलाने से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई होने वाली है। इससे पहले, 17 सितंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अधिकारियों को पराली जलाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, ताकि सख्त संदेश जा सके। इसके बाद, 60 से अधिक नोडल अधिकारियों, पर्यवेक्षी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, लेकिन किसी के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेटों के समक्ष शिकायत नहीं दर्ज कराई गई।