नए कृषि कानून को रद्द कराने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी आदि मांगों को लेकर चल रहा किसान आंदोलन गति पकड़ता नजर आ रहा है। किसान नेताओं और खाप चौधरियों ने केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र अंग्रेजों की नीति अपनाकर आंदोलन को खत्म करने की रणनीति बना चुका है।
किसानों की आवाज बुलंद कर रहे
किसान नेताओं को स्थानीय स्तर पर धमकाने के साथ ही फूट डालने की भी कोशिश जारी है। एकजुटता का अहसास कराने के लिए खाप चौधरी सोमवार (आज) खापों के पारंपरिक केंद्रीय मुख्यालय गांव सोरम (मुजफ्फरनगर) में पंचायत करेंगे। इसमें केंद्र के खिलाफ अहम निर्णय लेते हुए हरियाणा की खाप चौधरियों के साथ महापंचायत की जाएगी।
कड़ाके की ठंड में किसान 18वें दिन भी किसान दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर, दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर पर डटे रहे। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वह मांग पूरी हुएबिना पीछे नहीं हटेंगे। इसी बीच केंद्र पर किसानों और खाप चौधरियों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
निर्वाल खाप भारत चौधरी बाबा राजवीर सिंह मुंडेट का कहना है कि केंद्र सरकार के इशारे पर स्थानीय नेता किसानों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहे हैं। किसान नेताओं को किसी न किसी मामले में फंसाने की धमकी देकर चुप कराने की साजिश रची गई है, ताकि आंदोलन खत्म किया जा सके। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कई लोगों को धमकाने की सूचना मिल रही है। हालांकि, किसान नेता धमकियों को नजरअंदाज कर आगे बढ़ रहे हैं।
बैक डोर से साध रहे संपर्क
बाबा का कहना है कि भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायक आदि नेता बैक डोर से भी किसान नेताओं को प्रलोभन दे रहे हैं। अंग्रेजों की नीति पर चलकर उनका मकसद आंदोलन को खत्म कराने का है। यूपी और हरियाणा में खाप चौधरियों को भी प्रलोभन देने की कोशिश की गई है। वहीं, पंजाब से आए किसान नेताओं को भी अगले चुनाव में टिकट देने तक का लालच दिया गया है, परंतु किसान इन सबसे दूर होकर आंदोलन को चला रहे हैं।
केंद्र के खिलाफ आज अहम निर्णय
राजवीर सिंह मुंडेट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिला अंतर्गत सोरम गांव की चौपाल पर सोमवार को खाप चौधरी इकट्ठा होंगे। इस दौरान केंद्र के खिलाफ अहम निर्णय लिया जाएगा, जो पूरे देश में लागू होगा। हरियाणा के चौधरियों से भी संपर्क किया गया है और बहुत जल्द किसानों के समर्थन में देशभर के चौधरी महापंचायत करेंगे।