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दो साल बाद 'बुराड़ी का वो घर' आज गुलजार है.., सामने से गुजरने में डरते थे लोग

Fri, 03 Jul 2020 06:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  

सार

  • मोहन के परिवार ने दिखाया डर के आगे जीत है
  • बुराड़ी में एक साथ 11 लोगों की खुदकुशी का मामला
  • छह माह से इस घर में परिवार संग रह रहे हैं मोहन सिंह
  • ललित और भावनेश की दुकानें भी हुईं आबाद 
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बुराड़ी में अपने घर में मोहन सिंह... - फोटो : अमर उजाला
कथित रूप से सामूहिक मोक्ष प्राप्त करने की आस में बुराड़ी के एक घर में परिवार के 11 लोगों ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सामूहिक खुदकुशी की इस घटना के बाद इस मकान के सामने से गुजरने से भी लोग डरने लगे थे। लेकिन तमाम अफवाहों के बाद मोहन सिंह कश्यप और उनके परिवार ने इस मिथ को तोड़ दिया।
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बुराड़ी का वो घर.. - फोटो : Amar Ujala
पूजा-अनुष्ठान के बाद मोहन परिवार के साथ इस मकान में रहने लगे। लोगों ने उनको डराने की खूब कोशिश की। यहां तक कहा गया जो भी इस मकान में रहेगा वह बर्बाद हो जाएगा, लेकिन मोहन अडिग रहे और इन अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया। लगातार छह माह से रहते हुए उनको किसी डर या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। मकान मालिक दिनेश चुंडावत भी मोहन के रहने से बेहद खुश हैं।
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बुराड़ी का वो घर... - फोटो : Amar Ujala
मूलरूप से गांव धनेली-पूूर्बी, मिलक, रामपुर, यूपी के रहने वाले मोहन बताते हैं, करीब तीस साल पहले वह दिल्ली आए थे। परिवार में पत्नी कृष्णा सिंह, दो बेटी माल्या (12), मेध्या (5) और बेटा ध्रुव (8) है। बुराड़ी सामूहिक खुदकुशी से पूर्व मोहन, खुदकुशी करने वाले ललित और भावनेश की ही गली में वीरेंद्र त्यागी के मकान में ध्रुव डायग्नोस्टिक सेंटर चलाते थे। वारदात के बाद इस गली से भी गुजरने से लोग डरते थे। 

महिलाएं और बच्चे तो यहां बिल्कुल नहीं आते थे। ललित और भावनेश के मकान को मनहूस माना जाने लगा। यहां तक अकेले बचे ललित और भावनेश के भाई दिनेश चुंडावत मकान बेचने की बात करने लगे। मोहन ने मकान किराए पर लेने की बात अपनी पत्नी से की। पत्नी पहले तो घबराई, लेकिन बाद में तैयार हो गई। दरअसल मोहन का बेटा ध्रुव और बेटी माल्या ललित की भांजी प्रियंका से ट्यूशन पढ़ने जाते थे।

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बुराड़ी का वो घर.. - फोटो : Amar Ujala
सब होने के बाद 28 दिसंबर 2019 को मोहन परिवार समेत इस घर में शिफ्ट कर गए। ललित की लकड़ी की दुकान में मोहन ने अपने बेटे ध्रुव के नाम से डायग्नोस्टिक सेंटर (पैथ लैब) खोल लिया जबकि भावनेश की परचून की दुकान में मोहन की पत्नी कृष्णा ने दुकान खोल ली। मोहन और उनकी पत्नी कृष्णा बताती हैं कि आज तक उनके परिवार को मकान में कभी कोई परेशानी नहीं हुई। मकान में हादसा तो जरूर हुआ, लेकिन वह किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानते हैं। 
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बुराड़ी - फोटो : SELF
पड़ोसी बोले, मोहन ने लोगों के दिलों से निकाला डर
पड़ोसी वीरेंद्र त्यागी बताते हैं कि घटना के बाद से लोग बुरी तरह डर गए थे। लेकिन मोहन ने हिम्मत दिखाकर इस मकान में रहकर लोगों के दिलों से डर निकाल दिया है। अब न तो कोई इस मकान के सामने से निकलने से डरता है और न ही किसी को कोई परछाई दिखाई देता है।

ऐसे हादसों के बाद अक्सर लोग जानबूझकर अफवाहें फैलाते हैं। मकान मालिक दिनेश चुंडावत चूंकि कोटा, राजस्थान में रहते हैं, इसलिए वह अपना मकान बेचना चाहते हैं। लेकिन वह मकान की कीमत मार्केट रेट से ज्यादा मांग रहे हैं, इसलिए मकान का सौदा नहीं हो पा रहा है।
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बुराड़ी में 11 लोगों की मौत मिस्ट्री - फोटो : अमर उजाला
1 जुलाई, 2018 को एक साथ 11 लोगों ने लगा ली थी फांसी...
बुराड़ी, संतनगर, गली नंबर-2 के मकान नंबर-137 में एक जुलाई 2018 सुबह के समय पड़ोसी पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। घर में बुजुर्ग नारायणी देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57), प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33), नारायणी के दो बेटे भावनेश भाटिया (50), ललित भाटिया (45), भावनेश की पत्नी सविता (48), उसके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25), ध्रुव (15), ललित की पत्नी टीना (42) और उसका बेटा शिवम (15) फंदे पर लटके थे। दो लोगों को छोड़कर सभी के हाथ-पैर बंधे हुए थे।

आंखों पर पट्टी बंधी थी, उसमें रुई भी लगी हुई थी। पूरे परिवार की संदिग्ध हालात में फंदे पर लटकने से मौत हुई थी। संदिग्ध लगने पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। क्राइम ब्रांच को घर में लिखे कुछ रजिस्टर व अन्य कागज मिले थे।

उसके आधार पर इन लोगों को लगता था कि घर में ललित और भावनेश की पिता की आत्मा आती है। कथित रूप से मोक्ष प्राप्त करने के लिए घर में अनुष्ठान किया गया। इन लोगों को लगता था कि ऐसा करने से कोई मरेगा नहीं। लेकिन फंदे पर लटकने से सभी की मौत हो गई थी।
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