ब्लड कैंसर और रक्त से संबंधित दूसरी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एशियन इंडियन डोनर मैरो रजिस्ट्री की शुरूआत की।
इसके अंतर्गत अब कोई भी व्यक्ति स्टेम सेल्स डोनेट करने के लिए यहां पंजीकरण करा सकता है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री, एम्स निदेशक व एम्स के कुछ अन्य चिकित्सकों ने भी स्टेम सेल दान करने के लिए फार्म भरा है। साल के अंत तक 50 हजार डोनर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बुधवार को एम्स में स्टेल सेल्स डोनेट करने के लिए फार्म भरा और ब्लड सैंपल भी जमा कराया। एम्स निदेशक डॉ. एम.सी.मिश्रा ने भी ब्लड सैंपल दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्टेम सेल्स डोनेट करने के लिए आगे आने की अपील की है।
डॉ. एम.सी.मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में ल्यूकेमिया, थैलीसीमिया और एनीमिया के हजारों मरीज ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जिनका जीवन सिर्फ स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से ही बचाया जा सकता है।
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लिहाजा स्टेम सेल्स डोनेट करने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। अभी तक मरीज के लिए भाई-बहन अथवा परिवार के सदस्य ही स्टेम सेल्स डोनेट करते थे। इनमें भी एक चौथाई संभावना ही रहती थी कि उनका एचएलए (हृयूमन ल्यूकोसाइट एंटिजेन) मिल जाए।
एम्स के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एन.के.मेहरा ने बताया कि देश में हजारों की संख्या में मरीज स्टेम सेल प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। इस शुरुआत से ब्लड कैंसर मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि कोई भी स्वस्थ मरीज जिसकी उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच है वह स्टेम सेल दान कर सकता है। स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद शरीर में कई तरह ब्लड सेल्स उत्पन्न होते हैं और प्लेटलेट्स भी तैयार होता है। इसके अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करता है।