केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 में मानसिक बीमारी वाले रोगियों के कल्याण के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) को अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में प्राधिकरण का गठन करना था, लेकिन पांच साल तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई थी।
दिल्ली में पांच साल की देरी के बाद राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) के गठन को दिल्ली के उपराज्यपाल ने मंजूरी दे दी। साथ ही दिल्ली सरकार की उदासीनता की आलोचना करते हुए प्राधिकरण में विशेषज्ञों, रोगियों और देखभाल करने वाले प्रतिनिधियों और गैर सरकारी संगठनों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है।
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दरअसल, केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 में मानसिक बीमारी वाले रोगियों के कल्याण के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) को अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में प्राधिकरण का गठन करना था, लेकिन पांच साल तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई। केंद्र सरकार के दबाव के बाद केवल पदेन सदस्यों के साथ दिल्ली में एसएमएचए के गठन का प्रस्ताव रखा गया। एलजी ने इस गठन को मंजूरी दे दी। साथ ही अन्य अंगों को जल्द जोड़ने का निर्देश भी दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज को एक प्रस्ताव भी भेजा है।
इसमें कहा गया है कि एसएमएचए राज्य में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के रूप में नैदानिक मनोवैज्ञानिकों, मानसिक स्वास्थ्य नर्सों और मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ताओं को पंजीकृत करने के लिए जिम्मेदार होगा। इसको लेकर पंजीकृत मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की सूची प्रकाशित करने और कानून प्रवर्तन अधिकारियों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों सहित प्रासंगिक व्यक्तियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का भी आदेश दिया गया है।