दिल्ली के करोल बाग के होटल अर्पित में लगी आग में हुई मौत के बावजूद वाणिज्यिक गतिविधियों का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है। फोटो स्टेट, मोबाइल, रेस्तरां, डेकोरेशन सहित तमाम गतिविधियां चल रही हैं। निगम अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से इस पर पाबंदी नहीं लगाए जाने का स्थानीय लोग भी परेशान हैं।
कमाई के चक्कर में सुरक्षा मानकों की जारी है अनदेखी
अधिकतर कोचिंग संस्थान किराये पर संचालित हो रहे हैं। भवन मालिकों से किराये पर जगह लेने के वक्त न तो सुरक्षा से संबंधित पहलुओं का ध्यान दिया जाता है और न ही इसके लिए कोई फिक्रमंद है। संचालकों की कोशिश रहती है कि कम से कम खर्च में अधिक से अधिक कमाई कैसे की जाए। इस चक्कर में अपना भविष्य संवारने के लिए संस्थानों पर पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं पर लगातार हादसों का खतरा बना हुआ है।
डॉ. बृजेश सिंह, एडीसी, पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने बताया कि, सूरत की घटना के बाद ऐसे संस्थानों और प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजकर मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही उन पर कार्रवाई की जाएगी। अभी भी ऐसे संस्थानों और प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों सहित अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।