दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कालेज का माहौल फिर गरमा गया है। शिक्षकों ने प्रिंसिपल व प्रबंध समिति अध्यक्ष के खिलाफ बृहस्पतिवार से सात दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। स्टाफ एसोसिएशन के इस कदम को छात्र संगठन आइसा ने भी समर्थन दिया है। स्टाफ एसोसिएशन ने तीन जुलाई को प्रस्ताव पास कर प्रिंसिपल व प्रबंध समिति अध्यक्ष के खिलाफ धरना देने का फैसला किया था। स्टाफ एसोसिएशन की मांग है कि प्रिंसिपल व प्रबंध समिति अध्यक्ष को तत्काल हटाया जाए।
दरअसल, शिक्षकों का विरोध इस बात को लेकर है कि प्रबंध समिति अध्यक्ष ने 5 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी में बदलने के लिए हस्तेक्षप की मांग की थी। स्टाफ एसोसिएशन का कहना है कि वह प्रस्ताव उनकी सहमति के बिना व छात्रों को बिना सूचित किए हुए दिया गया था। स्टाफ काउंसिल जैसे किसी भी मंच पर प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की गई थी।
इस प्रस्ताव की जानकारी कालेज स्टाफ एसोसिएशन की ओर से दायर की गई आरटीआई के जवाब में पता चली। दिल्ली विश्वविद्यालय आइसा अध्यक्ष कंवलप्रीत कौर ने कहा कि बिना स्टाफ काउंसिल को सूचना दिए अध्यक्ष व प्रिंसिपल ने यह कार्य किया। उन्होंने कहा कि बीते माह भी छात्रों ने प्रिंसिपल डॉ अंजू श्रीवास्तव का विरोध किया था।
इस विरोध के बाद प्रिंसिपल ने छात्रों से मुलाकात कर आश्वासन दिया था कि हिंदू कालेज को एक स्वायत्त संस्थान के रूप में परिवर्तित करने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को इस मामले पर अंधेरे में रखा गया। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखने पर स्टाफ एसोसिएशन के दो सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।