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सेंट स्टीफंस मामले में प्रोफेसर को मिली राहत

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यौन उत्पीड़न मामले में फंसे सेंट स्टीफंस कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर सतीश कुमार को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान कर दी। अदालत ने सतीश कुमार की जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगने के अलावा अगले आदेश तक उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी। उन पर कॉलेज में पीएचडी कर रही छात्रा ने यह आरोप लगाया है।
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न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर ने प्रोफेसर कुमार को मामले की जांच में पुलिस को सहयोग करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने पुलिस को 17 अगस्त तक स्पष्ट करने का निर्देश दिया है क्यों न याची की जमानत स्वीकार कर ली जाए। प्रोफेसर ने खुद को निर्दोष बताते हुए अग्रिम जमानत मांगी है। निचली अदालत उनकी जमानत याचिका 23 जून को खारिज कर चुकी है।

याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और नितिन कुमार स्वरूप ने दलील दी कि छात्रा के सभी आरोप मनगढ़ंत हैं और मामले में कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं हैं।
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हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई

उनका कहना था कि छात्रा अक्तूबर 2013 में हुई घटना की शिकायत कर रही है और उसने जो ई-मेल कॉलेज प्रिंसिपल को किए थे, उसमें यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं लगाया और उसमें साफ जाहिर किया गया है कि उसने अपनी पढ़ाई के सिलसिले में खुद प्रोफेसर से संपर्क किया था। ऐसे में जो एफआईआर की गई है वह निरर्थक है।

वहीं, पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बृहस्पतिवार को छात्रा ने उन्हें एक ऑडियो रिकार्डिंग दी है, जिसमें कुमार और कॉलेज प्रिंसिपल विल्सन थंपू आपस में बात करते सुनाई दे रहें हैं और कुमार मामले की जांच को प्रभावित कर रहे हैं।

गौरतलब है कि छात्रा ने कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए 19 जून को मौरिस नगर थाने में एफआइआर दर्ज करवाई थी। छात्रा का आरोप था कि उन्होंने मामले की शिकायत कॉलेज प्रशासन से भी की थी, लेकिन उन्होंने प्रोफेसर को बचाने का प्रयास किया।

सेंट स्टीफंस के प्राचार्य को अदालत ने लगाई फटकार

विभिन्न कारणों से विवादों में आए सेंट स्टीफंस कॉलेज के प्रिंसिपल वाल्सन थंपू को हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि ऐसा क्या कारण है कि कॉलेज का हर व्यक्ति उनके खिलाफ है। क्या कारण हो सकता है कि छात्र, स्टाफ और शिक्षक उनके खिलाफ गठजोड़ करेंगे।

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रिंसिपल से कहा कि कॉलेज का स्टाफ आप के खिलाफ है, छात्र आपके खिलाफ हैं, टीचर खिलाफ हैं। हम सभी कॉलेज में पढ़े हैं और बिना किसी कारण सभी प्रिंसिपल के खिलाफ क्यों गठजोड़ करेंगे।

खंडपीठ ने प्रशासनिक अधिकारी एसके दास की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। याचिका में अधिकारी ने आरोप लगाया है कि उसे स्टोर रूम में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है जहां दीमक और छिपकलियां भरी पड़ी हैं। साथ ही आरोप लगाया कि वाल्सन थंपू ने उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया लेकिन उसके मना करने पर उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है।

इससे पहले 22 मई को हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल को फटकार लगाई थी और उनसे पूछा था की आखिर वह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहें हैं। ज्ञात रहे कि दास को गत वर्ष प्रिंसिपल ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाने के बाद निलंबित कर दिया था। इसके बाद दास मामले को लेकर अदालत में पहुंच गए थे और प्रिंसिपल पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। 21 अप्रैल हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश के बाद दास का निलंबन वापस लिया गया था।
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ऑडियो क्लिप की जांच की जा रही है : बस्सी

सेंट स्टीफंस कॉलेज की रिसर्च स्कॉलर से छेड़छाड़ मामले में ऑडियो क्लिप आने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने माना कि पीड़िता की ओर से पुलिस को एक ऑडियो क्लिप मिली है, जिसे जांच में शामिल कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि क्लिप की सच्चाई की जांच की जा रही है। उसके बाद पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचेगी। गौरतलब है कि पीड़िता ने प्रिंसिपल और आरोेपी प्रोफेसर से हुई बातचीत को रिकॉर्ड करने का दावा किया है और इसका ऑडियो क्लिप पुलिस को सौंपा है।

पीड़िता ने दावा किया है कि ऑडियो टेप से खुलासा हो जाएगा कि प्रिंसिपल और आरोपी प्रोफेसर ने इस मामले में उस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।
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