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भुखमरी के कगार पर पहुंचा मजदूर आलम, जब मदद लेकर आई एसएसबी तो निकल पड़े आंसू

Sun, 10 May 2020 09:08 PM IST
Vikas Kumar डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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शफीक आलम को खाना मुहैया कराता एसएसबी का जवान - फोटो : amar ujala
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दिल्ली के छत्तरपुर इलाके में बिहार निवासी मजदूर मोहम्मद शफीक आलम के पास खाने को कुछ नहीं बचा था। शफीक और उसका परिवार यह सोचकर परेशान था कि लॉकडाउन में अब आगे क्या होगा। रोटी कैसे मिलेगी, रुपया पैसा तो पहले ही खत्म हो चुका था। मोहम्मद शफीक टिकारी थाना (गया) क्षेत्र के ढिहुरी गांव का रहने वाला था। वह एसएसबी के बारे में थोड़ा बहुत जानता था। उसने किसी तरह से अपनी बात एसएसबी के पटना फ्रंटियर के आईजी तक पहुंचा दी। थोड़ी देर बाद ही बल के जवान खाना और दूसरा सामान लेकर उसके पास पहुंच गए। जब एसएसबी की गाड़ी मोहम्मद के घर पर आकर रूकी और उसे बताया गया कि वे उसकी मदद करने आए हैं तो उसकी आंखों से आंसू निकल आए।

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मोहम्मद शफीक आलम दिल्ली के छतरपुर इलाके में साड़ी की एक फैक्टरी में काम करता था। लॉकडाउन के कारण फैक्टरी बंद हो गई। इससे उसकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई। पहले सप्ताह तक तो खाना मिलता रहा, लेकिन बाद में दिक्कत आ गई। वह और उसका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए। 

मोहम्मद शफीक आलम ने सशस्त्र सीमा बल के पटना फ्रंटियर के आईजी से संपर्क किया। उसने अपने किसी जानकार से मदद के लिए पूछा था तो उन्होंने आईजी का नंबर दे दिया। आईजी ने तुरंत बल की 29 वीं वाहिनी, गया के कमांडेंट राजेश कुमार को आदेश दिया कि वह मोहम्मद शफीक आलम की यथा संभव मदद करे। उसके घर पर राशन पहुंचाया जाए। उक्त अधिकारी ने अपने समकक्ष दिल्ली में तैनात कमांडेंट सुमन सौरभ से बात की। सौरभ, दिल्ली में कानून एवं व्यवस्था की ड्यूटी में अपनी कंपनी के साथ तैनात हैं। यह बात शनिवार रात को हुई थी। सौरभ ने दस मई की सुबह शफीक आलम से मुलाकात कर उन्हें 10 किलो चावल, दो किलो दाल, मसाले के पैकेट, सरसों का तेल, नमक, पांच किलो आलू व प्याज, दो किलो चीनी व दो किलो सोयाबीन आदि राशन उपलब्ध कराया।
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मोहम्मद शफीक आलम ने जब ये राशन लिया तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने दुख के समय एसएसबी का साथ मिलने पर सशस्त्र सीमा बल का आभार प्रकट किया है। आलम का कहना था कि उन्होंने रात में ही अपनी भूखमरी की बात एसएसबी तक पहुंचाई थी। सशस्त्र सीमा बल ने बहुत ही कम समय में मदद पहुंचा दी। आलम का कहना था कि लॉकडाउन खत्म होने के उपरांत वह अपने गांव जाकर छोटा मोटा काम करेगा। यहां की स्थिति अब ठीक नहीं है।

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