क्रिकेटर अंकित केशरी ने सिर में लगी चोट के कारण दम तोड़ दिया। ऐसा ही हादसा शहर के एक प्रतिभाशाली नेशनल स्तर के जिमनास्ट ब्रिजेश के साथ भी हो चुका है।
सालभर पहले की बात है। अभ्यास करते समय उनके गर्दन में चोट लगी और उन्हें बचाया न जा सका। अभी हाल ही में गुड़गांव के राज्यस्तरीय खिलाड़ी सचिन भी मौत के मुंह में जाने से बाल-बाल बचे हैं। ऐसे हादसे होने के बावजूद खेल विभाग सबक नहीं ले रहा।
सभी खेलों को मिलाकर फरीदाबाद में करीब पांच हजार खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से जिले में कोई स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर नहीं बनाया गया, जहां वह अपना इलाज ठीक से करवा सकें।
ऐसे में खेल विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि जिले के सरकारी अस्पताल में एक ऐसा सेंटर खोला जाए, जहां स्पोर्ट्स इंजरी मेडिकल विशेषज्ञ ही खिलाड़ियों का इलाज करे।
इससे फायदा यह होगा कि जख्मी खिलाड़ी का सही समय और जानकार डॉक्टर से इलाज होगा। साथ ही डोपिंग से भी बचेंगे। खेल विशेषज्ञों के मुताबिक, आम डॉक्टरों से दर्द की दवाई लेकर खाने पर डोपिंग के केस में फंसने का डर रहता है।
मानव रचना यूनिवर्सिटी में कार्यरत स्पोर्ट्स वैज्ञानिक प्रोफेसर जीएल खन्ना का कहना है कि हर शहर में स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर बनना चाहिए ताकि चोट लगने के बाद होनहार खिलाड़ियों का अच्छी तरीके से इलाज हो सके। वे डोपिंग से भी बच सकेंगे। विशेषज्ञ रहेंगे तो उन्हें सुरक्षित दवा मिलेगी।
क्या कहते हैं खिलाड़ी
केस- 1
-ब्रिजेश को सेक्टर-12 खेल परिसर में प्रशिक्षण के दौरान गर्दन और रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। पहले यह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती रहे। उसके बाद इनके परिजनों ने इन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन 21 मार्च 2014 को यह होनहार खिलाड़ी दुनिया छोड़ गया।
केस-2
-दयालपुर के रहने वाले जितेंद्र जूडो के नेशनल खिलाड़ी हैं। इनके हाथ में प्रशिक्षण के दौरान 2011 में चोट लगी थी। इसके बाद लगातार एक साल तक निजी अस्पताल से इलाज करवाया। उनकी मांग है कि शहर में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का सेंटर होना चाहिए। जहां खिलाड़ियों की छोटी-मोटी चोट ठीक की जा सके।
केस- 3
पलवल की हरजीत कौर का नाम डोपिंग के केस में फंसे खिलाड़ियों की सूची में आया। इस पर उनके पिता बादाम सिंह का कहना था कि यह डॉक्टर की सलाह के अनुसार विटामिन की दवाई खा रही थी। नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से पहले इनके हाथ में दर्द हुआ था, जिसके बाद इन्होंने डॉक्टर से दवाई ली थी।
खेल परिसर में कुछ खेलों के खिलाड़ियों की संख्या
गेम----------------------------कोच का नाम---------------------------संख्या
बास्केटबॉल----------------सुनील भारद्वाज,सरजीत सिंह-------------------250
एथलेटिक्स----------------धमेंद्र, मैरी, अनिता भाटिया--------------------700
जूड़ो--------------------------------भीम सिंह----------------------------150
क्रिकेट-----------------------राजकुमार, कृ ष्णकुमार---------------------450
स्वीमिंग-----------------------------माधुरी----------------------------150-180
बैटमिंटन----------------------------आदित्य---------------------------80-90
जिमनास्टिक------------------------नवीन सैनी-------------------------60-80
स्केटिंग----------------------------जॉन डेविड--------------------------50-60
खिलाड़ियों का दर्द
अभी एक सप्ताह पहले ही अभ्यास के दौरान कमर में चोट लगी है। दो दिन तक बर्फ घिसकर घरेलू उपचार किया, लेकिन दर्द और सूजन कम नहीं हुई। शहर में स्पोर्ट्स विशेषज्ञ नहीं हैं। आम डॉक्टरों से इलाज करवाने में डर लगता है। इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल से करवा रहा हूं। आने-जाने में काफी परेशानी होती है। यदि शहर में ही स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर हो तो काफी अच्छा रहेगा।
-मोहित भाटिया, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी
खेल में एक अच्छे कोच और ट्रेनर के साथ ही एक फिजियो भी होना बहुत जरूरी है। खेल से संबंधित फिजियो को पता रहता है कि चोट कैसे लगी और उसका इलाज कैसे करना चाहिए। त्रिपुरा में रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान दाएं हाथ में चोट लगी थी, जो अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हुई है। इसलिए हर शहर में ऐसे सेंटर हों तो खिलाड़ियों के लिए अच्छा रहेगा।
-अजय रत्रा, पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर
क्रिकेट खेल ही ऐसा है जिसमें चोट अक्सर लगती रहती है। मुझे भी कई बार चोट लगी है, जिसका इलाज आम डॉक्टर भी कर देते हैं, लेकिन जिस खिलाड़ी की मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या आती है उसे एक स्पोर्ट्स विशेषज्ञ ही ठीक कर सकता है।
-श्वेता, क्रिकेटर
बॉक्सिंग, जूडो, जिमनास्टिक आदि के खिलाड़ियों को ज्यादा चोट लगती है। अभी विभाग खिलाड़ियों का जीवन बीमा करने की योजना बना रहा है।
-एसपी राणा, जिला खेल अधिकारी