यूं तो हरियाणा की अपनी खेल नीति है। खेल के क्षेत्र में हरियाणा के अव्वल होने का दावा किया जाता है लेकिन इस राज्य का एक ऐसा भी शहर है जहां खेल को बढ़ावा देने के लिए दशक पहले तैयार की गई योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।
हम बात कर रहे हैं औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की। सेक्टर 12 में दशक पहले इंडोर स्टेडियम की नींव रखी गई थी। सरकारी तंत्र की लेटलतीफी के चलते प्रोजेक्ट की लागत करीब 8 करोड़ बढ़ गई है, लेकिन खेल प्रेमियों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है।
राज्य खेल परिसर में इंडोर स्टेडियम बनाने की योजना 2006 से पहले बनी थी। यानि दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले इसका निर्माण शुरू हो गया था। कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान पूरी दिल्ली बदल गई।
कई स्टेडियम बनकर तैयार हो गए, लेकिन फरीदाबाद का इंडोर स्टेडियम अब भी अधूरा है। तमाम अड़चनों के चलते यह प्रोजेक्ट फंसा रहा। डिजाइन और बजट में फेरबदल के कारण कई साल तक इंडोर स्टेडियम का काम रुका रहा।
हालांकि, चार साल पहले एक बार फिर प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ी, लेकिन अब भी अधूरे ढांचे के अलावा यहां कुछ दिखाई नहीं देता। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत 12.50 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन 2012 में इसके डिजाइन में संशोधन किया गया और प्रोजेक्ट की लागत 17 करोड़ पहुंच गई।
लगातार हो रही देरी की वजह से अब 3 करोड़ रुपये का बोझ और बढ़ गया है। मार्च 2016 तक इंडोर स्टेडियम तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब मार्च 2017 डेडलाइन तय की गई है।
जिस रफ्तार से काम किया जा रहा है, उसको देखते हुए अगले साल भी इस प्रोजेक्ट का खेल प्रेमियों को फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। वहीं, जिले में बेहतर खेल सुविधाएं न होने का फायदा निजी एकेडमी उठा रही हैं।
अब एसी बना अड़चन
इंडोर स्टेडियम की राह में अब एसी अड़चन बन गया है। स्टेडियम की इमारत का ढांचा बनकर तैयार हो गया है। इसकी फिनीशिंग का काम किया जा रहा है।
अब इसे वातानुकूलित बनाने की जरूरत समझी जा रही है। इंडोर स्टेडियम में एसी का बंदोबस्त करने के लिए तीन करोड़ रुपये का एस्टिमेट बनाकर हुडा मुख्यालय भेजा गया, जिसे अब जाकर स्वीकृति मिल पाई है। ऐसे में एसी की वजह से अब काम में देरी होगी।
बिना प्लानिंग के कैसे बनी योजना
आपको जानकर हैरानी होगी कि बिना किसी ठोस प्लानिंग के वर्षों पहले इंडोर स्टेडिम बनाने की योजना तैयार कर ली गई। इसका असर बार-बार स्टेडियम के काम में रुकावट के तौर पर देखने को मिला।
करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट का काम बिना अप्रूव एजेंसी से डिजाइन पास कराए बिना शुरू कर दिया गया था। सवाल उठे तो काम भी रुक गया। 2012 में हुडा ने इसका डिजाइन तैयार कराया और एनआईटी कुरुक्षेत्र मंजूरी के लिए भेजा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू हो सका।
क्या-क्या होंगी सुविधाएं
हुडा ने इंडोर स्टेडियम का डिजाइन दिल्ली के ताल कटोरा इंडोर स्टेडियम को देखकर तैयार किया है। हालांकि जिले में बनने वाला यह इंडोर स्टेडियम ताल कटोरा से छोटा होगा, लेकिन इसमें अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिशें की गई हैं। डिजाइन के मुताबिक बेडमिंटन, टेबल-टेनिस, वॉलीबाल, जिमनास्टिक, कुश्ती, बॉक्सिंग, लॉन टेनिस, स्केटिंग, वेट लिफ्टिंग, बास्केटबॉल, गोला फेंक, भाला फेंक, सॉफ्ट बॉल और एथलेटिक्स जैसे खेल के आयोजन इस स्टेडियम में कराए जा सकेंगे। इसके साथ ही प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो सकेंगे।