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खेल दिवस पर विशेष: बुलंदशहर की धरती से भी निकले हैं खेल के ‘महारथी’

Sat, 29 Aug 2020 04:28 PM IST
पूजा त्रिपाठी चेतन शर्मा, अमर उजाला, बुलंदशहर

सार

- कैनोइंग, कुश्ती और शूटिंग समेत अन्य खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनवा चुके हैं लोहा
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भारत में खेल - फोटो : ट्विटर
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विस्तार
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बुलंदशहर जिले का क्रिकेट, शूटिंग, कुश्ती, कैनोइंग समेत अन्य खेलों से पुराना नाता रहा हैं। क्रिकेट में जहां भुवनेश्वर कुमार, तो शूटिंग में पूनम पंडित, कुश्ती में अनुष्का पंडित और कैनोइंग में शांति स्वरूप, लांजेन गाबी, शिवानी और अरविंद सोलंकी जैसे खिलाड़ी दिए हैं।

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इनके अलावा भी जनपद में दर्जनों खिलाड़ी हैं जो सरकारी सुविधाओं के बगैर देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। बीते पांच सालों में खेलों की सुविधाओं का स्तर बढ़ा है, लेकिन सरकारी स्तर पर खेलों के लिए सीमित बजट ने खेल विभाग के हाथ बांधकर रखे हुए हैं।

कई खेलों की कोचिंग के लिए खिलाड़ियों को निजी एकेडमी का रुख करना पड़ता है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की याद में 29 अगस्त को खेल दिवस मनाने की प्रथा को कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन कुछ प्रदेशों को छोड़कर बाकी में खेल और खिलाड़ियों की दशा में सुधार नहीं आया हैं।
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लड़कों को अखाड़े में पटखनी दे रहीं अनुष्का
सिकंदराबाद नगर क्षेत्र के मोहल्ला कायस्थवाड़ा निवासी संतोष शर्मा की पुत्री अनुष्का पंडित कुश्ती की खिलाड़ी है। वे अब तक 240 प्रतियोगिता जीत चुकी हैं और 25 में बराबरी पर रही हैं। अनुष्का का सपना है कि वह देश के लिए खेले और परिवार के साथ जनपद और प्रदेश का नाम रोशन कर सके। अनुष्का के पिता ने बताया कि उसने अखाड़े में जनपद बुलंदशहर के अलावा, गाजियाबाद, मेरठ, हाथरस, अलीगढ़ और मथुरा आदि के पुरुष पहलवानों को पटखनी देकर दर्जनों ट्राफी जीती हैं। 

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50 से अधिक मेडल अपने नाम कर चुके हैं शांति स्वरूप

शिकारपुर क्षेत्र के गांव करैना निवासी साधारण परिवार में जन्मे नानक चंद के पुत्र शांति स्वरूप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। शांति स्वरूप ने बताया कि जनपद में कैनोइंग के लिए कोई सुविधा नहीं है। निजी एकेडमी में तैयारी करने के कारण वह देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। शांति स्वरूप ने बताया कि 14वें और 15वें एशियाई नौकायान प्रतियोगिता में और राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2018 व 2019 में प्रतिभाग कर चुके हैं। वर्ष 2003 से 2019 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन कांस्य पदक, राष्ट्रीय स्तर पर 39 गोल्ड, चार रजत और चार कांस्य पदक जीत चुके हैं।

देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है जनपद की बहू 
मूलरूप से मणिपुर निवासी कैनोइंग खिलाड़ी लांजेन गाबी करैना निवासी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शांति स्वरूप की पत्नी हैं। लांजेन गाबी 2013 में जर्मनी में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर चुकी हैं। लांजेन गाबी ने बताया कि नेशनल स्तर पर 18 गोल्ड, दो रजत और दो कांस्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। साथ ही वह छह बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। 

विपरीत परिस्थितियों में पूनम पंडित बनीं विजेता
सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव इस्माइलपुर निवासी पूनम पंडित उर्फ अंजलि साधारण परिवार से हैं। घर की हालत सही न होने पर पूनम ने बचपन में अपने हौसलों से घर की दुश्वारियों को दूर करने का प्रण लिया। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान घर से बाहर जाने की सोची तो मां ने खेतों पर मजदूरी कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साथ ही तत्कालीन सिकंदराबाद कोतवाल रहे जितेंद्र कालरा ने भी आगे बढ़ने में मदद की। इसके बाद पूनम का आगे बढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया। 2016 में मुंबई में आयोजित हुए नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप के अलावा अन्य प्रतियोगिताओं में से तीन बार क्वालीफाई कर चुकी हैं। स्पोर्ट्स पिस्टल में उत्तराखंड में गोल्ड जीतकर जनपद का नाम रोशन किया। 

चुनौतियों के बीच पर्वातारोहण का जुनून जारी
नगर क्षेत्र के मोहल्ला देवीपुरा द्वितीय में साधारण परिवार में जन्में डॉ. मोमराज सिंह के पुत्र भूपेश कुमार का सफर बचपन से काफी कठिनाइयों भरा रहा हैं। भूपेश ने वर्ष 2007 से चोटियों को फतह करने का सफर शुरू किया। अब तक वह 25 से अधिक चोटियों पर तिरंगा फहरा चुके हैं। चोटियों को फतह करने के दौरान कई बार परेशानियां भी आई। भूपेश ने बताया कि चढ़ाई के दौरान पहाड़ों पर शून्य से माइनस 15 डिग्री तापमान का भी सामना करना पड़ता है। वर्ष 2016 में हिमाचल के माउंट कुल की 7036 मीटर चढ़ाई के दौरान बर्फीली दरार में फंस गए थे। जिसके बाद उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया था और उनका लंबा उपचार चला था।
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