निजी एयरलाइंस स्पाइसजेट और सन ग्रुप के प्रमुख कलानिधि मारन तथा उनकी काल एयरवेज विवाद मामला हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के पास पहुंच गया है। स्पाइसजेट व उसके प्रमोटर अजय सिंह ने सिंगल जज के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 12 माह में उसे अदालत में 579 करोड़ रुपये जमा कराने व मामले की निपटारा मध्यस्थ न्यायाधिकरण में करने का निर्देश दिया था। इस याचिका पर आठ अगस्त को सुनवाई होगी।
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने अपने 29 जुलाई के फैसले में स्पाइसजेट को निर्देश दिया था कि वह पांच किस्तों में दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के नाम 579 करोड़ रुपये फिक्स डिपोजिट जमा कराए। इसकी पहली किस्त अगस्त में जमा करानी होगी।
अदालत ने कहा है कि स्पाइसजेट के शेयर किसी तीसरे पक्ष को जारी करने या हस्तांतरित करने पर रोक का अंतरिम आदेश अभी बरकरार रहेगा। अदालत का यह फैसला मारन और उनकी विमानन कंपनी की याचिका पर आया था और उन्होंने मांग की थी कि स्पाइसजेट की खरीद-बिक्री के 2015 के समझौते (एसपीए) के अनुसार उन्हें इस एयरलाइन के शेयर वारंट जारी किए जाएं।
मारन और उनकी कंपनी की याचिका में आरोप लगाया कि था स्पाइसजेट को करीब 579 करोड़ रुपये भुगतान करने के बावजूद विमानन कंपनी ने उन्हें शेयर वारंट या परिवर्तनीय भुनाने योग्य तरजीह शेयर की पहली और दूसरी किस्त जारी नहीं की।