सीएए व एनसीआर के विरोध में पहले लंगर शुरू किए गए थे। जब वहां लोग एकत्रित होने शुरू हो गए तो लंगर को धरनास्थलों में बदला दिया गया था। दक्षिण भारत की एक राजनीतिक पार्टी से जुड़े एडवोकेट डीएस बिंद्रा ने ज्यादातर जगहों पर लंगर शुरू किए थे।
डीएस बिंद्रा ने धरना स्थलों के आयोजकों व समर्थकों की आर्थिक सहायता भी की थी। इसके अलावा ज्यादातर जगहों पर जो लोग धरनों में भाग ले रहे थे वह धरनास्थल के पास ही किराए पर मकान लेकर रहने लग गए थे।
दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि चांद बाग में रहने वाले एक युवक के गवाह के तौर पर चार अप्रैल को कोर्ट के सामने बयान दर्ज किए गए हैं। युवक खान ने अपने बयानों में कहा है कि 15 जनवरी के आसपास चांद बाग में लंगर शुरू हुआ था। मौके पर जाकर पता लगा कि लंगर पुराने मुस्ताबाबाद के सुलेमान सिद्दकी और डीएस बिंद्रा ने शुरू किया है।
दो दिन बाद इन लोगों ने माइक से कहा कि यहां पर धरना शुरू कर दिया गया है। यहां पर डीएस बिंद्रा ने भड़काऊ भाषण देते हुए कि ये सरकार भी मुसलमानों के साथ वहीं करेगी तो 1984 सिखों के साथ हुआ था। इनके भाषण से प्रभावित होकर वह, उपासना, शादाब व रविश के साथ धरनास्थल को संभालने लगे।
दिल्ली पुलिस ने एक गवाह माइक (कोड नेम) के बयान कोर्ट में 24 मार्च को कराए। इस गवाह ने अपने बयानों में कहा है कि वह खुरेजी पेट्रोल पंप के पास इशरत जहां, स्थानीय नेता खालिद सैफी व अन्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। यहां पर हर रोज भड़काऊ भाषण देते थे।
यहां पर जामिया व अन्य जगहों के लोग आने लग गए। कुछ दिनों में धरनास्थल पर हजारों लोगों का जुटना शुरू हो गया। ऐसे में लोगों ने धरनास्थल के आसपास किराए पर मकान लेकर रहना शुरू कर दिया। इस तरह लोग शाहीनबाग में भी किराए पर मकान व कमरा लेकर रहने लग गए थे।