कोरोना संक्रमण के चलते लोग यात्रा से परहेज कर रहे हैं। आलम यह है कि पर्यटन के लिहाज से अभी पीक सीजन है, लेकिन लोग बच्चों की छुट्टियां होने के बावजूद लंबी दूरी की यात्रा से बच रहे हैं। रेलवे के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है कि ट्रेन से यात्रा करने की मारामारी नहीं है। अभी 230 स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। नई दिल्ली से अन्य रूट के लिए चलने वाली ट्रेनों में भीड़ है भी तो वापसी में आने वाली ज्यादातर ट्रेन खाली आ रही हैं।
रेल मंत्रालय और ट्रेन चलाने की तैयारी में तो है, लेकिन यात्रा करने वालों का रुझान देखकर संभव है कि कम ही ट्रेनें पटरी पर उतरे। क्योंकि न तो लोग पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल और न ही छुट्टिया बिताने के लिए अपने गृह प्रदेश जाने को तैयार है। हां अति आवश्यक काम वाले लोग जरूर ट्रेनों से यात्रा कर रहे हैं। पूर्वांचल की तरफ जाने वाली ज्यादातर ट्रेनों में आरक्षित बर्थ जुलाई महीने में खाली है। आप चाहे तो आसानी से आरक्षित बर्थ बुक करा सकते हैं। हालांकि प्रमुख ट्रेनों में वेटिंग टिकट मिल रहा है।
कानपुर जाने वाली ट्रेन, जिसमें नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल ट्रेन शामिल है। इसमें आरक्षित टिकट आसानी से बुक हो रहे हैं। प्रयागराज जाने वाली ट्रेेन 14 जून तक फुल है। इसमें महज 4-5 की ही वेटिंग है। यही हालत शिवगंगा, बिहार संपर्क क्त्रसंति ट्रेन में है। लखनऊ जाने वाली कई ट्रेनों में 14 जून तक आसानी से टिकट उपलब्ध है। लखनऊ मेल में भी यात्रा करना चाहे तो सीट उपलब्ध है। हालांकि गोरखधाम, महामना ओर गोमती एक्सप्रेस में वेटिंग टिकट जून महीने में मिल रहा है।
गोरखपुर जाने वाली सत्याग्रह व गोरखधाम स्पेशल में भी वेटिंग बहुत ज्याद नहीं है। मुंबई जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें खाली हैं। गोल्डन टेंपल, पश्चिम एक्सप्रेस, मंगला स्पेशल में भी अधिक भीड़ ऩहीं है, जबकि ये रेलवे की अति व्यस्त रूट में शामिल है। गर्मियों में तो गोवा, वैष्णो देवी, मुंबई, शिमला जाने वालों की भारी भीड़ होती है, लेकिन कोरोना के भय से यात्री यात्रा से बच रहे हैं। आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर अगले महीने सभी दिशाओं में जाने वाली ट्रेनों में सीट मौजूद है। वापसी वाली ट्रेनों में तो ज्यादातर आरक्षित बर्थ खाली है।