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गुरुग्रामः 2 मिनट की चूक होती तो खत्म हो जाता परिवार, नाइट ड्यूटी ने बचा ली जान

Fri, 25 Jan 2019 06:33 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
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बचाव कार्य में जुटी एनडीआरएफ की टीम - फोटो : अमर उजाला
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बृहस्पतिवार सुबह 2 मिनट की चूक होती तो मेरा भी परिवार तबाह हो जाता। मुझे अपने परिवार के बचने की तो खुशी है साथ ही साथ मकान के मलबे में तब्दील होने का भी दुख हो रहा है। मेरी खून पसीने की मेहनत पल भर में खत्म हो गई। यह बताते हुए गांव उल्लावास निवासी धर्मेन्द्र की आंखों में आंसू आ गए। कुछ इसी तरह से दर्द बयां करते हुए जोगेन्द्र भी रो पड़े। उन्होंने कहा कि मेरी भी अगर दिन की ड्यूटी होती तो उनका भी परिवार खत्म हो जाता।

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धर्मेन्द्र ने बताया कि उनका मकान दया राम की निर्माणाधीन बिल्डिंग के साथ था। वह ड्राइवरी करते हैं और पाई-पाई जोड़कर उन्होंने अपना एक मंजिला मकान बनाया। जिस वक्त हादसा हुआ, वह उठे हुए थे। दया राम को उन्होंने कई बार मकान बनाने से मना किया, लेकिन वह नहीं माना। जिद्द पर आकर वह मकान की घंटों तराई करता था। जिससे उनके मकान में सीलन आ गई। बुधवार शाम को जब दया राम ने अपने मकान की चौथी मंजिल की शेटरिंग डाली तो उन्हें काफी डर लग रहा था। 

बृहस्पतिवार सुबह जब लेंटर गिरने की आवाज आई तो उन्होंने अपने मकान की छत पर जाकर देखा तो वह सहम गए। तुरंत ही नीचे आए और अपनी पत्नी को जगाया। उसे नींद में ही पकड़कर बाहर की तरफ भागे। जैसे ही वह बाहर पहुंचे तो दया राम का मकान मलबे में तब्दील हो गया और उनके मकान का एक बड़ा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। धर्मेन्द्र ने बताया कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उनका परिवार बच गया, लेकिन मेहनत की कमाई से बनाया गया मकान क्षतिग्रस्त हो गया। 
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नाइट ड्यूटी ने बचाई जान

पत्नी को बचाने वाला धर्मेंद्र - फोटो : अमर उजाला
जमींदोज हुए मकान में रहने वाले जोगेन्द्र ने बताया कि वह उनकी पायनियर कंस्ट्रक्शन कंपनी में नाइट ड्यूटी करते हैं जबकि उनके बेटे मोहित की दिन की ड्यूटी थीं। बेटा रात को सोया हुआ था और वह ड्यूटी पर गए हुए थे। यदि ड्यूटी पर न गए होते तो वह भी इसी मलबे के नीचे दबकर अपने प्राण त्याग चुके होते। इसी बिल्डिंग में रहने वाले रामजीत भी उन्हीं के साथ ड्यूटी गए थे, जिसके कारण वह भी बच गए।

भैंस ने बचाई दयाराम की जान
हादसे से 5 मिनट पहले तक दयाराम इसी निर्माणाधीन इमारत में मौजूद थे। यहां उन्होंने 2 भैंस बांधी हुई थी। जिसका दूध निकालने के बाद वह भैंसों को लेकर अपने दूसरे प्लॉट में चले गए थे। जब तक वह भैंस को वहां बांधकर वापस लौटे, तब तक उनकी निर्माणाधीन इमारत जमींदोज हो चुकी थी। 
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