वैवाहिक विवाद से लेकर चेक बाउंस, भूमि और व्यावसायिक मामलों तक में मिल सकता है समाधान का विकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नागरिकों को आपसी सहमति से विवादों का सरल और शीघ्र समाधान उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), नूंह की ओर से विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0’ के तहत चलाया जा रहा यह अभियान 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगा। अभियान के दौरान आमजन को मध्यस्थता के लाभों और इसके जरिए विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के बारे में जागरूक किया जा रहा है। सीजेएम एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नूंह नेहा गुप्ता ने बताया कि मध्यस्थता विवाद निपटारे का सरल, किफायती और समय बचाने वाला माध्यम है। इसमें दोनों पक्ष बातचीत और आपसी सहमति से अपने विवाद का समाधान निकाल सकते हैं। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे में भी मदद मिलती है और पक्षकारों का समय व संसाधन बचता है।
इन मामलों में हो सकती है मध्यस्थता : डीएलएसए के अनुसार वैवाहिक विवाद, दुर्घटना क्लेम, चेक बाउंस, समझौता योग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, वसूली, निष्पादन कार्यवाही, आर्बिट्रेशन, व्यावसायिक व सेवा संबंधी विवाद, बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण, श्रम कानून तथा अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। न्यायालयों में लंबित उपयुक्त मामलों के पक्षकार भी मध्यस्थता का विकल्प अपना सकते हैं। इसके लिए वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला मध्यस्थता केंद्र या संबंधित न्यायालय में संपर्क कर सकते हैं। पात्र एवं जरूरतमंद लोगों को डीएलएसए की ओर से कानूनी सहायता और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाता है। यह अभियान भारत के सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) की पहल है। इसका उद्देश्य मध्यस्थता को लोगों के लिए सुलभ, किफायती और प्रभावी विवाद समाधान का माध्यम बनाना है। डीएलएसए ने नागरिकों से अपील की है कि जहां संभव हो, विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए मध्यस्थता की सुविधा का लाभ उठाएं।