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फ्लैट के नाम पर रुपये हड़पने वाला सपा यूथ विंग का राष्ट्रीय सचिव गिरफ्तार

Sun, 26 Mar 2017 05:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार


- प्लॉट व फ्लैट देने के नाम पर लोगों से हड़पे रुपये, कोर्ट ने दोनों को घोषित किया था भगोड़ा
- दिल्ली पुलिस का आरोप- पहले ही हो जाती गिरफ्तारी पर यूपी पुलिस ने नहीं किया था सहयोग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
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विस्तार
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सरिता विहार थाना पुलिस ने समाजवादी पार्टी की यूथ विंग के राष्ट्रीय सचिव विनोद यादव को उसके साथी सुनील नागर के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ग्रेटर नोएडा में लोगों से प्लॉट व फ्लैट देने के नाम पर लाखों रुपये ठग लिए थे। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया था।
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दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस पहले भी दोनों को गिरफ्तार करने गाजियाबाद गई थी, मगर यूपी पुलिस ने सहयोग नहीं किया था। उस समय यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी।

डीसीपी रोमिल बानिया के अनुसार सरिता विहार थानाध्यक्ष मुकेश त्यागी की देखरेख में एसआई नागेंद्र नागर, वरुण चेची, एएसआई खलील अहमद, सिपाही राहुल व दिलशाद की टीम ने विनोद यादव और सुनील नागर को क्रॉसिंग रिपब्लिक, गाजियाबाद यूपी स्थित उनके घरों से शुक्रवार रात को गिरफ्तार किया।
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विनोद मूलरूप से बमेटा गांव कविनगर गाजियाबाद का रहने वाला है। शनिवार को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने इन्हें एक दिन की रिमांड पर लिया। आरोपियों ने सरिता विहार स्थित डीएलएफ टॉवर में विनसून बिल्ड और मैक्स बालाजी ग्रुप नाम से वर्ष 2011 में ऑफिस खोले।
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कोर्ट ने दोनों को घोषित किया था भगोड़ा

- फोटो : Pintrest
इन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित डिफेंस सिटी प्रोजेक्ट फेज- एक, दो व तीन में लोगों को प्लॉट और फ्लैट देने का वादा कर उनसे लाखों रुपये ले लिए। खास बात यह है कि जिस जमीन पर लोगों को प्लॉट काटे गए, वह जमीन कभी इनके व इनकी कंपनी के नाम नहीं थी। आरोपियों ने लोगों को न तो रुपये दिए और न ही जमीन।

पहले केस में पीड़ित अर्जुन सिंह व 16 अन्य ने शिकायत की थी। इनसे करीब 45 लाख रुपये ठगे गए। दूसरे केस में वंदना सिंह व दो अन्य शिकायतकर्ता हैं। इनसे करीब 16 लाख रुपये ठगे गए। सुनील दोनों ही मामलों में और विनोद एक मामले में भगोड़ा घोषित था।

​कोर्ट ने विनोद यादव को 5 जुलाई, 2016 को और सुनील नागर को 19 अगस्त, 2016 व 5 जुलाई, 2016 को भगोड़ा घोषित किया था। सुनील 2015 में गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद दोनों ने 2015 में ही रुपये लौटाने के नाम पर जमानत ले ली थी, मगर इन्होंने पीड़ितों को रुपये नहीं लौटाए।
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