जुनपत गांव के समीप जंगल में मंगलवार सुबह सपा नेता संजय नागर (45) का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। शव के पास से ही पुलिस को 26 पेज मिले हैं, जिसमें नेता, अफसर, परिवार व रिश्तेदार को संबोधित पत्र लिखे गए हैं। पुलिस के मुताबिक, संजय नागर के नाम से लिखे सभी पत्रों में चार बेटियों और दो बेटों के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाने की मांग की गई है। परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं। पुलिस नेे फिलहाल शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
मूलरूप से गांव इमलिया निवासी संजय नागर (45) डेल्टा-2 में परिवार के साथ रहते थे और ठेकेदारी का काम करते थे। वे समाजवादी पार्टी के नेता थे और पूर्व में पार्टी के एक संगठन में पदाधिकारी भी रहे थे। सोमवार शाम लगभग तीन बजे संजय घर सेे निकले थे। इसके बाद देेर रात तक घर नहीं पहुंचे। मोबाइल पर फोन करने पर रिसीव नहीं कर रहे थे। मंगलवार सुबह पुलिस व परिजनों को सूचना मिली कि संजय का शव जुनपत गांव के पास स्थित जंगल में पेड़ पर लटका हुआ है। पुलिस और एफएसएल टीम नेे मौके पर पहुंचकर पड़ताल की।
मेरे बच्चों शहर शिक्षित कराना, मुझे माफ कर देेना
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- फोटो : अमर उजाला
नेता, अफसर, परिवार, दोस्त, गांववासी व रिश्तेदार को संबोधित 25 अलग-अलग पेज में लिखा था कि मेरे बच्चेे बहुत होशियार और मेहनती हैं। वो शहर में पढ़े हैं, उन्हें शहर में पढ़ाने की व्यवस्था कर देना। संजय नागर के नाम से लिखे इन पत्रों में दोस्त, परिवार व गांववासियों से माफ कर देने की भी बात लिखी है। एक पेज 6 जुलाई, 2011 को खरीदा गया स्टांप है। इसमें क्या लिखा है, इसकी पुलिस नेे ठीक सेे जानकारी नहीं दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह कोई पुराना शपथ पत्र या एग्रीमेंट है।
संजय की नहीं है लिखावट
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- फोटो : अमर उजाला
संजय नागर के साथ उनकी पत्नी के भाई अजय भाटी भी रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनका काम ठीक चल रहा था। किीस तरह की कोई परेशानी नहीं थी। अजय ने हत्या की आशंका जताते हुए दावा किया है कि पत्रों में लिखावट उनकी नहीं है। साथ ही यह भी बताया कि पेड़ की ऊंचाई इतनी है कि संजय वहां तक चढ़ नहीं सकते थे। इसके अलावा उन्होंने रस्सी की गांठ को देखकर भी सवाल खड़े किए हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता एडवोकेट श्याम सिंह भाटी ने बताया कि संजय सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव रह चुके थे। वे काफी सशक्त मानसिकता के थे, उनके जैसा व्यक्ति आत्महत्या नहीं कर सकता।
जूते इस तरह से उतरे थे, जैसे खुद ही उतारे हो
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शव के पास से 26 पेज मिले हैं। मौका मुआयना में संजय के जूते इस तरह से उतरे थे, जैसे खुद ही उतारे हो। प्राथमिक पड़ताल में आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन शव पोस्टमार्टम को भेजकर जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने पर सच्चाई का पता चल जाएगा।
- अनुज कुमार, सूरजपुर कोतवाली प्रभारी