वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने मतदाता सूची में नाम शामिल करने से जुड़े एक मामले में जवाब दाखिल किया है। यह मामला कथित तौर पर भारतीय नागरिक बनने से पहले उनके नाम को मतदाता सूची में शामिल करने से संबंधित है। उन्होंने अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की याचिका पर यह जवाब दिया है।
यह जवाब अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका के संबंध में है। विकास त्रिपाठी की शिकायत मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की है। वह सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। सोनिया गांधी की ओर से एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष जवाब दाखिल किया। न्यायाधीश ने 4 जुलाई के आदेश में इसे दर्ज किया, और अदालत ने 25 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है।
विकास त्रिपाठी ने 16 मई को अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक आवेदन दायर किया था। उन्होंने 18 अप्रैल को चुनाव आयोग की 1980 की एक रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद ही अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का आवेदन किया गया। अदालत ने 30 मार्च को सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायतकर्ता की दलीलें सुनी थीं। अदालत ने सोनिया गांधी के वकील की दलीलें भी सुनीं।
अदालत में दलीलें
अदालत ने सोनिया गांधी के वकील से पूछा कि वह इस मुद्दे को कैसे दरकिनार करेंगे कि वह 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता बनीं। सोनिया गांधी के वकील आर एस चीमा ने इसे 'फिशिंग और रोविंग' जांच बताया। शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी के वकील अजय बर्मन ने तर्क दिया कि भारतीय नागरिक बने बिना मतदाता सूची में नाम शामिल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल जाली दस्तावेज या धोखाधड़ी से ही हो सकता है। अदालत ने मामले को लगभग आधी सदी पुराना बताया, जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने जाली दस्तावेज और धोखाधड़ी की जांच की मांग की।