24 घंटे निगरानी जरूरी
डॉक्टरों ने कहा कि लंबे समय तक भूखे रहने से हुई हल्की से मध्यम डिहाइड्रेशन से उबरने के लिए और किसी भी दिक्कत को समय पर पकड़ने के लिए 24 घंटे निगरानी जरूरी है। ऐसे में अस्पताल ने कहा कि मरीज को सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं। वांगचुक को शनिवार से अस्पताल के इमरजेंसी इमारत के आठवीं मजिंल पर भर्ती किया गया है, जहां निर्धारित स्टाफ और दिल्ली पुलिस के अलावा किसी और को अंदर जाने की अनुमति नहीं है।
सोनम वांगचुक ने हाथ से लिखा लेटर किया जारी
सोनम वांगचुक ने सोमवार को अस्पताल से हाथ से लिखा नोट जारी किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि वह अपना अनशन आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने नोट में लिखा कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे युवाओं के साथ जिस क्रूरता से व्यवहार किया जा रहा है, उसे देखते हुए वह अपना अनशन तब तक जारी रखेंगे, जब तक कि युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती। या उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती।
'इन युवाओं से मैं बहुत प्रभावित हूं'
उन्होंने लिखा कि उम्मीद है कि सरकार शिक्षा मंत्री जवाबदेही तय करेंगे। युवाओं ने उकसावे के बावजूद जिस तरह शांति बनाए रखी है, उससे मैं बहुत प्रभावित और भावुक हूं। उन्होंने सरकार और पुलिस बल से अपील कि की वे छात्रों को जल्द से जल्द संसद के समक्ष अपनी शिकायतें रखने की अनुमति देकर इस मुद्दे को हल करें। उन्हें यकीन है कि कल युवा प्रदर्शनकारी अपनी बात रखेंगे। वे सोमवार की तरह ही धैर्य और सहनशीलता दिखाएंगे।
संसद मार्च में शामिल होने की मांगी थी अनुमति
इससे पहले वांगचुक सफदरजंग अस्पताल के निदेशक को ने एक और नोट लिखा था, जिसमें उन्होंने अस्पताल से उन्हें चलो संसद मार्च में शामिल होने के लिए छुट्टी मांगी। उन्होंने लिखा कि कि उनकी तबीयत बिल्कुल ठीक है और हेल्थ रिपोर्ट भी नॉर्मल है। वांगचुक ने आग्रह किया कि वे अस्पताल से थोड़े समय के लिए बाहर जाना चाहते हैं ताकि वे चलो संसद मार्च में शामिल हो सकें। ऐसे में उन्होंने पूछा है कि अस्पताल कह रहा है वे हिरासत में नहीं हैं, फिर उन पर पाबंदियां क्यों लगाई गई हैं।