ज्योति नगर इलाके में एक बेटे ने अपने नाबालिग पुत्र के साथ मिलकर 70 वर्षीय मां की गला घोटकर हत्या कर दी। आरोपी को शक था कि उसकी मां मकान को उसके दो भाइयों के नाम कर देगी। परिवार वालों के शक जताने पर पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की, जिसमें उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर वारदात में शामिल नाबालिग बेटे को भी पकड़ लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जिला पुलिस उपायुक्त ने बताया कि मृतका की पहचान माया देवी के रूप में हुई है। माया देवी अपने तीन बेटों और उनके परिवार के साथ मीत नगर इलाके में रहती थी। तीनों बेटे मजदूरी करते हैं। बुधवार दोपहर माया की दूसरी बहू ने अपने बेटे को दादी के पास खाना खाने के लिए पूछने भेजा। काफी आवाज लगाने पर जब दादी की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो पोते ने यह बात अपनी मां को बताई।
उसके बाद बहू सास के पास आकर उसे हिलाया लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं होने पर महिला ने शोर मचाकर पड़ोसियों को बुलाया। इस दौरान किसी ने घटना की जानकारी पुलिस को दे दी। पुलिस ने महिला को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि महिला की गला घोटकर हत्या की गई है।
पूछताछ के दौरान परिवार वालों ने 55 वर्षीय बड़े बेटे और उसके नाबालिग बेटे पर शक जताया। उन लोगों ने बताया कि बड़ा बेटा नशे का आदी है और अकसर घर में लड़ाई झगड़ा करता था। उसकी आदतों की वजह से परिवार में उसकी किसी से भी नहीं बनती थी। इस वजह से वह काफी समय तक हाथरस के नगरिया गांव में रहा।
दूसरे बेटों से नजदीकी होने की वजह से वह अपनी मां से भी अकसर झगड़ा करता था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो आरोपी इनकार करता रहा लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर अपना अपराध कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसे शक था कि मां उसे मकान में हिस्सा नहीं देगी।
वारदात के बाद घर में ही थे दोनों आरोपी
परिवार वालों ने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी और उसका नाबालिग बेटा अपने घर में मौजूद थे। जब महिला की बहू ने शोर मचाया उस समय भी दोनों घर से बाहर नहीं निकले और न ही अस्पताल पहुंचे।
मकान में हिस्सा लेने के लिए कोर्ट में चल रहा है केस
पुलिस अधिकारियों ने जांच के बाद बताया कि मकान में हिस्सा लेने के लिए बड़े बेटे ने कोर्ट में केस डाल दिया था। बात इतनी बिगड़ चुकी थी कि महिला ने गुस्से में आरोपी बेटे के घर के हिस्से की बिजली कटवा दी थी। इसी वजह से उसे डर था कि मां उसे मकान में हिस्सा नहीं देगी और पूरे मकान को उसके दो भाइयों के नाम कर देगी।