मां अपने बच्चों को इस उम्मीद के साथ बड़ा करती है कि वह उसके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे। लेकिन समय के साथ शायद ये रिश्ते भी बदल गए हैं।
संपत्ति के लिए बुजुर्ग माता-पिता के साथ मारपीट तो पुरानी बात हो गई, अब जायदाद हड़पने के लिए मां को मां न मानने से भी औलाद परहेज नहीं कर रही।
कड़कड़डूमा अदालत के महानगर दंडाधिकारी एके. अग्रवाल ने त्रिलोकपुरी निवासी महिला लक्ष्मी देवी (71) की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। मयूर विहार पुलिस ने सोमवार को उसके बेटे व अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया।
क्या संपत्ति के लिए इतना गिर गया जाएगा?
पीड़िता महिला ने अपने बेटे फूलचंद गुप्ता, किरण गुप्ता, जितेंद्र गुप्ता, रूपेश गुप्ता, सुरेंद्र सिंह और चंदो व एसआई अरविंद कुमार पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, मारपीट व धमकी देने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता दलविंदर सिंह नन्नर ने कहा कि पीड़िता की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए पहले उसका विश्वास जीत कर दस्तावेज हासिल किए। उसके बाद उनके आधार पर संपत्ति अपने नाम कर ली।
इन दस्तावेजों को बनाने के लिए फूलचंद ने जिस शख्स को गवाह बनाया है उसकी मौत 1990 में हो गई थी जबकि उसे 1992 में जिंदा बताकर उसके दस्तखत लिए गए हैं।
मां ने कहा डीएनए चेक कर लो
पीड़िता ने बेटे के झूठ को सामने लाने के लिए डीएनए जांच की मांग की है। पीड़िता के बेटे का तर्क है कि वह उसकी मां नहीं बल्कि मौसी है। जिस प्लॉट पर विवाद है वह उनकी मां का है, जिसकी मौत हो चुकी है।
इन दस्तावेजों को बनाने के लिए फूलचंद ने जिस शख्स को गवाह बनाया है उसकी मौत 1990 में हो गई थी जबकि उसे 1992 में जिंदा बताकर उसके दस्तखत लिए गए।
पीड़ित महिला लक्ष्मी देवी का कहना है कि यह प्लॉट उसने 1995 में प्रकाश कौर से खरीदा था और बयाने की रसीद पर फूलचंद ने गवाह के तौर पर दस्तखत किए थे। पीड़िता लक्ष्मी का दावा है कि वह ही फूलचंद की मां है और इसकी पुष्टि डीएनए जांच से हो सकती है।