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'कोई यूपीएससी की वेबसाइट हैक कर शरारत कर रहा है'

Mon, 06 Jul 2015 06:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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यूपीएसी में चौथा स्थान हासिल करने वाली वंदना राव ने 2012 में इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन किया था। तब वंदना को MNC से जॉब का ऑफर मिला था।
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इसके 3 साल बाद वंदना ने यूपीएससी 2014 की परिक्षा में चौथा स्थान हासिल किया। 24 साल की वंदना राव साउथवेस्ट दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र के कंगंनहेड़ी गांव में रहती हैं।

वंदना को यूपीएससी में मिली ये सफलता किसी मिसाल से कम नहीं है। उनके मुताबिक परिक्षा में ये उनका दूसरा गंभीर प्रयास था। हालांकि इस बार अपने चयन को लेकर उन्हें पूरा विश्वास था।
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लेकिन खुद को टॉप टेन रैंक में पाकर वह हैरान रह गई। जब उसे पता चला कि रिजल्ट आ गया है तो वह टॉपर्स की लिस्ट के देखने के लिए गई।
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किसने हैक की थी वेबसाइट?

रिजल्ट में चौथी रैंक पर अपना चेहरा देखकर वह हैरान रह गई। कुछ समय के लिए उसने सोचा कि किसी ने यूपीएससी की वेबसाइट हैक कर ली है और कोई शरारत कर रहा है।

वंदना निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता सहायक सब-इंस्पेक्टर के पद पर दिल्ली पुलिस हैड क्वार्टर में कार्यरत हैं। वंदना ने सिस्टम में रहकर गरीबों के लिए काम करने का एजेंड़ा तय किया था।

सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा वंदना को उसके पिता से मिली, जिन्होंने कांउस्टेबल से अपने करियर की शुरूआत की थी। उसके पिता हरि राम यादव ने बताया कि वे खेती-किसानी की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। वंदना ने वो उपलब्धि हासिल की है, जो उनके गांव में अबतक कोई भी नहीं कर पाया है।

कांस्टेबल और ऑफिसर के बीच अंतर करीब से देखा

हरि राम यादव का चयन 12वीं के बाद ही दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर हो गया था। वह इससे आगे नहीं पढ़ सके, लेकिन उनके संघर्ष ने उन्हें अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरित किया।

यादव के मुताबिक उन्होंने एक आईपीएस अफसर और कांस्टेबल के बीच अंतर को काफी करीब से देखा है। इस अनुभव ने ही उन्हें बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया।

कड़ी मेहनत के अलावा यादव अपनी बेटी की सफलता का श्रेय अपने सीनियर और पुलिस हैड क्वार्टर के डिप्टी कमिश्नर हरिदंर कुमार सिंह को भी देते हैं, जिन्होंने वंदना का मार्गदर्शन किया।

वंदना ने बताया कि सबकुछ बहुत आसान नहीं था। उसने अपने करियर के लिए इंजीनियरिंग को चुना था। इसके लिए 2008 में उसने कुरुक्षेत्र के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया।
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बिना कोचिंग ही बनाया कीर्तिमान

लेकिन उस दौरान मार्केट में पैदा हुए मंदी के हालातों के कारण उसने दोबारा करियर के बारे में सोचा। फिर इंजीनियरिंग के तीसरे साल में उसने सिविल सर्विस के लिए मन बनाया और चौथे साल परिक्षा दी और आश्चर्यजनक रूप से उसने इसे क्लीयर भी कर लिया।

वंदना इंफोसिस से मिले जॉब का ऑफर को भी छोड़कर तैयारी करती रही। इससे पहले किए गए दो प्रयास और कड़ी मेहनत इस बार काम आयी।

अपने रूटीन के बारे में वंदना ने बताया कि वह रोजाना कई समाचार पत्र पढ़ती थी और उसने कोई कोचिंग भी ज्वॉइन नहीं की। सिविल सर्विस की तैयारी में लगे दूसरे स्टूडेंट्स को भी वे यही सलाह देती है कि कोचिंग में अपना ज्यादा समय और उर्जा बर्बाद न करें।

साभार- इंडियन एक्सप्रेस
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