नोटबंदी से कालाधन और भ्रष्टाचार खत्म करने का दावा केन्द्र सरकार कर रही हैं। लेकिन सांसदों की संपत्ति हर साल कैसे बढ़ जाती है, इसकी जानकारी साझा करने में केन्द्र का आयकर विभाग मौन है।20 सांसदों की संपत्ति के मामले पर आयकर विभाग (आईटी) से जवाब मांगा था।
छह साल पुराने मामले पर जवाब देने की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2016 थी। लेकिन आयकर विभाग ने इन सांसदों की सूचना सीआईसी को नहीं दी। केन्द्रीय सूचना आयोग(सीआईसी) के सूचना आयुक्त बसंत सेठ और श्रीधर आचार्युलू की बैंच ने 10 अगस्त 2016 को आयकर विभाग को आदेश दिया था कि वह तीन महीने में सांसदों की संपत्ति को सार्वजनिक करने के बारे में जवाब दे।
साथ में विभाग यह भी बताए कि यह सूचना जनहित से क्यों नहीं जुड़ी है। 10 नवंबर को मियाद भी खत्म हो गई लेकिन विभाग ने सीआईसी को किसी प्रकार का जवाब नहीं दिया। जबकि चुनाव सुधार पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने आरटीआई आवेदन फरवरी 2010 में फाइल की थी।
पहली अपील से भी असंतुष्ट एडीआर ने सीआईसी में दूसरी अपील की। सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने जानकारी न देने का कारण थर्ड पार्टी और पब्लिक इंटरस्ट में जानकारी का न होना बताया।
इनकी मांगी थी जानकारी
एडीआर ने वर्ष 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में अपनी संपत्ति घोषित करने वाले सांसदों के ब्यौरे का अध्ययन किया। इसमें पाया कि 20 सांसद ऐसे हैं जिनकी संपत्ति पांच सालों में कई गुना बढ़ गई है।
दरअसल, शपथपपत्र में सभी उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना पड़ता है, लेकिन आयकर विभाग के पास ही इस संबंध में छोटी से छोटी जानकारी होती है, जिससे पता चल सकता है कि इन सांसदों की संपत्ति किन-किन माध्यमों से बढ़ी।
हैरत की बात यह है कि वर्ष 2009 और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान चार सांसदों की संपत्ति 1200 प्रतिशत और 22 सांसदों की संपत्ति 500 प्रतिशत बढ़ चुकी थी। एडीआर की प्रोग्राम ऑफिसर लक्ष्मी श्रीराम ने बताया कि जब आयकर विभाग ने आरटीआई आवेदन का जवाब नहीं दिया तो हमने देश के सभी सांसदों और सभी राज्यों के विधायकों को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वे खुद अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करें। इसका नतीजा यह हुआ है कि सिर्फ दो दर्जन सांसदों और विधायकों ने ही ब्लॉग और दस्तावेजों के माध्यम से अपनी सपंत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया।
एडीआर ने 2010 में कांग्रेस के नवीन जिंदल, सचिन पायलट, दीप गोगई, कुमारी शैलजा,ज्योतिरादित्य सिंधिया, बेनी प्रसाद वर्मा व भाजपा से उदय सिंह, मेनका गांधी, दुष्यंत सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके अलावा बसपा के सांसद शफीकउर रहमान, सपा की ऊषा वर्मा, आरएलडी के अजीत सिंह, राजद के लालू प्रसाद यादव, बीजेडी के मोहन जेना, सीपीएम के बाजू बज्न रियान, डीएमके के टीआर बालू, एनसीपी के शरद चन्द्र गोविंद रॉय,एसएचएस के शिवाजी पाटिल और एसएडी की सांसद परमजीत कौर की भी जानकारी आयकर विभाग से मांगी थी। वर्तमान में इनमें कुछ सांसद अन्य दल में शामिल हो चुके हैं।