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Noida : वैश्विक समस्याओं का समाधान सनातन से, अलख जगा रहा भारतीय संस्कृति वैश्विक न्यास

Sun, 06 Apr 2025 06:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

सेवानिवृित्त के बाद दीपक सिंघल ने भारतीय संस्कृति वैश्विक न्यास की स्थापना की है। न्यास का उद्देश्य आमलोगों को यह बताना है कि पूरे विश्व की समसामयिक समस्याओं का समाधान सनातन से मुमकिन है। इसके लिए दीपक सिंघल 75 देशों की यात्रा कर चुके हैं। 
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यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दीपक सिंघल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने सनातन का रुख किया है। सेवानिवृित्त के बाद दीपक सिंघल ने भारतीय संस्कृति वैश्विक न्यास की स्थापना की है। न्यास का उद्देश्य आमलोगों को यह बताना है कि पूरे विश्व की समसामयिक समस्याओं का समाधान सनातन से मुमकिन है। इसके लिए दीपक सिंघल 75 देशों की यात्रा कर चुके हैं। 

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मौजूदा समय में वैश्विक समस्याओं का समाधान सनातन से कैसे किया जा सकता है इसको लेकर वह और उनके सहयोगी न्यास बनाकर अलख जगा रहे हैं। साथ ही वैश्विक प्रसन्नता, शांति, समृद्धि, सद्भाव, स्वास्थ्य पर जोर दे रहे हैं। यह जानकारी देते हुए दीपक सिंघल ने बताया कि न्यास में 200 से ज्यादा प्रोफेसर व विचारक जुड़े हुए हैं। 

इसमें प्रोफेसर कपिल कपूर, प्रोफेसर जगबीर सिंह, प्रोफेसर रजनीश मिश्रा, डॉ. मनोहर सिंदे, डॉ. गंगोपाध्याय, डॉ. रवि प्रकाश आर्य प्रमुख हैं। 2000 पुस्तकों का अवलोकन अब तक किया जा चुका है। यह देखने को मिल रहा है कि इंटरनेट पर सनातन से जुड़ी कई जानकारियां भ्रामक या तोड़-मरोड़ कर पेश की जा रही हैं। सनातन दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति है।
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इसके साक्ष्य अलग-अलग देशों में वहां के ग्रंथों में मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार के कार्यकाल में सनातन स्वतंत्रता आगे बढ़ी है। प्रयागराज में महाकुंभ जैसा आयोजन इसका बड़ा उदाहरण है। आगे इस स्वतंत्रता को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए सनातन से जुड़े सही तथ्यों के प्रचार-प्रसार की जरूरत है। 

इसके लिए न्यास सनातन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) लाने जा रहा है। इसके लिए शोध चल रहा है। बहुत से ग्रंथ खंगाले जा रहे हैं और उनसे निकलने वाले तथ्य इंटरनेट व सनातन एआई से जोड़े जाएंगे। इसको लेकर विश्व के कई इंजीनियरों व विद्वानों से न्यास ने संपर्क किया है। 

ग्लोबल प्रॉब्लम सनातन सॉल्यूशन
न्यास की तरफ से वैश्विक समस्याओं में चारित्रिक पतन, स्व केंद्रित संस्कृति, मानसिक प्रदूषण, धन अर्जन की अंधी दौड़, आध्यात्मिक एवं भौतिक संतुलन का अभाव, संस्कृति केंद्रित परंपरागत मूल्यों का त्याग, स्वास्थ्य के प्रति आत्मबोध का अभाव, अशांति, युद्ध, कट्टरवाद, आतंकवाद, आर्थिक साम्राज्यवाद, धर्म परिवर्तन व अन्य को शामिल किया है। न्यास का कहना है कि इन सभी वैश्विक समस्याओं का समाधान सनातन में मौजूद है।

भ्रामक नैरेटिव सेट किया गया
भारतीय संस्कृति वैश्विक न्यास के संयोजक दीपक सिंघल इस बात को बहुत जोर देते हुए कहते हैं कि भारत और सनातन को लेकर कई भ्रामक नैरेटिव सेट किए गए। सबसे समृद्ध संस्कृति भारत की थी। लेकिन उस पहलू को न दिखाकर सांप-संपेरों का देश कहा गया। इसी तरह सनातन को लेकर भी कई भ्रामक तथ्य इंटरनेट पर डाले गए हैं। इन भ्रामक और गलत तथ्यों को उजागर करने के साथ सही तथ्य भी युवा पीढ़ी के सामने रखना जरूरी है। न्यास की कोशिश हर घर को सनातन से जोड़ने की होगी। बाततीच...

आप तो देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्य सचिव रहे हैं फिर यह सनातन का परचम फिर से दुनिया में फहराने का खयाल कहां से आया? 
तीन वर्ष पूर्व आयरलैंड यात्रा के दौरान एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने चर्चा में कहा कि सुभाष चंद्र बोस भी आईसीएस थे और उन्होंने राजनीतिक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। आप भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं इसलिए आपको सांस्कृतिक स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू करनी चाहिए। फिर उन्होंने हिंदू अमेरिका पुस्तक देते हुए कहा कि दिल्ली जाकर प्रो. कपिल कपूर से मिलना। इसके बाद यह सफर शुरू हुआ।

सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में आप अभी कहां तक पहुंचे हैं? 
इस क्रम में मैंने 75 देशों की यात्रा की है। हर देश में सबसे प्राचीन संस्कृति सनातन थी इसके प्रमाण मिले हैं। 2000 से अधिक पुस्तकों का अवलोकन न्यास के विद्वान साथियों ने किया है। इससे मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि भारत सभ्यताओं की जननी है, संस्कृत भाषा सबसे प्राचीन भाषा है। आगे वैश्विक सनातन संघ की स्थापना करने का लक्ष्य है।

सनातन अध्ययन को लेकर विश्व में कई संस्थाएं काम कर रही हैं। ऐसे में न्यास इन संस्थाओं से अलग कैसे है? 
भारतीय संस्कृति वैश्विक न्यास सिर्फ सनातन अध्ययन   तक सीमित नहीं है। इसके आगे सनातन से विश्व की     मौजूदा समस्याओं का समाधान कैसे हो सकता है यह     बताना है। दूसरे देशों की तरफ से चलाए जा रहे कई  प्लेटफॉर्म के जरिये सनातन को लेकर गलत जानकारी या  तोड़-मरोड़कर तथ्यों के साथ पेश की जा रही है। विश्व को सनातन से जुड़ी सही जानकारियां मिलें। इसके लिए न्यास सनातन एआई को स्थापित करने जा रहा है। इसके साथ ही देश और विश्व में जो ज्ञान की संपदा है उसको भी एक मंच देकर सहेजने की कोशिश है।

सनातन एआई का जिक्र आपने किया। इसकी परिकल्पना क्या है और इससे आम जन को क्या मिलेगा? 
दूसरे देशों के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के नाम पर अलग-अलग प्लेटफॉर्म  हैं। कोई भी प्लेटफॉर्म वही जवाब देगा जो उसके अंदर जानकारी डाली गई होगी या फिर जो स्रोत होगा। इन प्लेटफॉर्म पर सनातन संस्कृति से जुड़े सवालों के जवाब सही नहीं मिल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर विभिन्न साहित्यों में वेदों को अनादि, अनंत बताया गया है। इसके बावजूद कई जगहों व पब्लिक डोमेन में वैदिक काल की अवधि को 1500 बीसीई से 500 बीसीई के मध्य दर्शाया गया है। बहुत से तथ्य गलत हैं जिनको न्यास ने चिह्नित किया है इसलिए न्यास सनातन एआई लाने की तैयारी कर रहा है। इसमें संस्कृत,पाली, प्राकृत, गुरुमुखी, द्रविड़ व अन्य क्षेत्रीय भाषा में जो सनातन के मूल ग्रंथ और साहित्य हैं उसको अपलोड किया जाएगा। 

आपकी योजना और न्यास की तैयारियां बहुत ही व्यापक हैं। जो लक्ष्य तय किए हैं उनकी पूर्ति क्या बगैर राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से हो पाएगी? 
बिना राज्य शक्ति के विश्व में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ है। पूरा विश्व कई तरह की समस्याओं से घिरा हुआ है, इन समस्याओं का समाधान सिर्फ सनातन में है। सनातन के जरिये पूरे विश्व को रास्ता दिखाने का काम भारत ही कर सकता है और विश्वगुरु होने की बात की प्रमाणिकता दे सकता है। इसके लिए जरूरी है कि राज्य और केंद्र स्तर पर सांस्कृतिक सलाहकार परिषद जैसी इकाई का गठन हो, जो नीति आयोग की तरह काम करे। इसी तरह सरकार को बौद्धिक संपदा कोष भी बनाना चाहिए।
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मोदी-योगी सरकार में सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए क्या कुछ कदम उठाए गए हैं? 
बिल्कुल, मोदी और योगी सरकार ने सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में कई काम किए हैं। ताजा उदाहरण प्रयागराज में हुआ विश्व का सबसे बड़ा आयोजन महाकुंभ है। महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई, जो सनातन की मजबूती की दिशा में शुभ संकेत है। इसी तरह 500 वर्ष बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण भी सनातन संस्कृति के उदय का प्रतीक है।

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