बैंकिंग प्रणाली में क्रांतिकारी विस्तार के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश को सोलर एटीएम का तोहफा देने जा रही है। अगले दो महीनों में इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा के लिए यह क्रांतिकारी कदम होगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। इस बात का खुलासा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने की। हर्षवर्धन गुरुग्राम के भोंडसी स्थित पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा बनाए भारत यात्रा केंद्र में विश्व मरूस्थलीकरण रोकथाम दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे।
प्रौद्योगिकी मंत्री का दावा है कि इससे देश के डिजिटल बैंकिंग व डिजिटलाइजेशन में नया अध्याय जुटेगा। नकदी रहित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही रुपये के कारण होने वाले अपराध में भी कमी आएगी। मंत्री का कहना है कि सोलर एटीएम %मेड इन इंडिया’ के तहत विकसित किया गया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को देखते हुए इसे विकसित किया है। इसका ट्रायल चल रहा है। दो महीने में यह पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू कर दिया जाएगा।
देश में नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हो रही परेशानी को देखते हुए विकल्प तलाशने का जिम्मा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा था। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को परेशानी खत्म करने के साथ डिजिटलाइजेशन और नकदी रहित अर्थव्यवस्था को मजबूती दिया जा सके। मंत्रालय ने कोलकाता के प्रोफेसर एसी गोन चौधरी के नेतृत्व में एक टीम बनाई। टीम ने %मेड इन इंडिया’ टैग के साथ सोलर एटीएम का निर्माण कर लिया है।
मंत्री हर्षवर्धन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में अशिक्षित होने के कारण धोखाधड़ी का खतरा होता है। इसे देखते हुए इसे बायोमैट्रिक सिस्टम से जोड़ा गया है। इसमें पैसा निकालने के लिए नंबर लिखने के बजाय 2000, 500 और 100 रुपये के नोट के चित्र आएंगे। जिसे पहचान कर एटीएम से लेनदेन कर सकेंगे। इसमें सभी खाताधारकों का चित्र भी दिखेगा। बैलेंस जमा और लेनदेन की जानकारी लिखने के साथ सुन भी सकेंगे।