मोरटा गांव में एक बंदर द्वारा विकलांग मासूम की गला दबाकर हत्या किए जाने से लोग हैरान हैं। गांव में यह भी चर्चा है कि पहले जब बंदर आया था, तो विकलांग मासूम मोहन के जुड़वां भाई सोहन ने उस पर पत्थर बरसाए थे। इसी से बंदर आक्रामक हो गया और कुछ देर बाद वापस आकर मोहन पर हमला कर उसकी जान ले ली।
मृतक के बड़े भाई छह वर्षीय श्रीकांत ने बताया कि बंदर पहले करीब 11 बजे आया था। इस पर सोहन और अन्य सभी बच्चे डर गए और उसे भगाने के लिए पत्थर मारे।
बंदर भाग गया और बच्चे अंदर कमरे में जाकर खेलने लगे। इसी बीच बंदर दोबारा दीवार पर आया। खेल में बच्चों का ध्यान बंदर की ओर नहीं गया और वह कमरे के गेट पर पहुंच गया।
बंदर को अंदर आया देख तीनों बच्चे शोर मचाते हुए भाग निकले, मगर अपाहिज मोहन पलंग पर लेटा रह गया। हादसे में इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि मोहन की मौत का कारण जुड़वां होना रहा। सोहन और मोहन जुड़वां होने के कारण लगभग हमशक्ल हैं। इस घटना के बाद गांव में लोगों में बंदरों को लेकर आक्रोश है।
बुढ़ाना का रहने वाला है परिवार
मूलरूप से मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी बबलू का परिवार 15 साल से मोरटा में रह रहा हैं। परिवार मेें पिता ओमपाल, मां बालेश, पत्नी शशि और चार बच्चे गोलू (8), श्रीकांत (6), जुड़वा मोहन एवं सोहन (4) हैं।
इनमें मोहन बचपन से ही विकलांग है। बबलू और ओमपाल ईंट भट्टे पर काम करते हैं, जबकि बालेश एक स्कूल में चपरासी है। बबलू ने बताया कि पत्नी छह दिन से दिल्ली स्थित मायके में है। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल की।
मोदीनगर की कई कॉलोनियों में रिश्तेदार नहीं ले जाते फल
मोदीनगर। मोदीनगर क्षेत्र का लाइन पार इलाका ऐसा है जहां बंदरों के डर से रिश्तेदार फल ले जाना गंवारा नहीं समझते हैं। इस क्षेत्र में पिछले कई साल में बंदरों के डर के कारण छत से गिरने से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
बड़ी संख्या में लोग बंदरों का शिकार हुए हैं। वर्ष 2014 में बंदरों से निजात दिलाने की मांग को लेकर सभासदों ने मोर्चा भी खोला था। मगर अधिकारियों ने आज तक सुध नहीं ली है।
मोदी शुगर मिल से सटी लाइनपार क्षेत्र की भूपेंद्रपुरी, चूना भट्टी, इंद्रापुरी, सीकरी रोड, उमेश पार्क, दलीप पार्क, तेल मिल, कृष्णापुरा, तिबड़ा रोड, बाग कालोनी में बंदरों का आतंक है।
नगर पालिका परिषद के सभासद विनोद गौतम बताते है कि इलाके में एक या दो ही घर बाकी होेंगे, जिनके परिवार के सदस्य को बंदरों ने नहीं काटा होगा।
सभासद की मानें तो बंदरों के आतंक के चलते इन कालोनियों में मेहमान फल लाने से कतराने लगे हैं। 2014 में अचानक कई बंदरों के खूंखार बनने के कारण सभासद विनोद गौतम के नेतृत्व में कालोनी के लोगों ने तहसील पर प्रदर्शन भी किया था।
कई दिन मामला सुर्खियों में रहा था। इसके लंगूर लाने के लिए नगर पालिका परिषद में टेंडर छोड़ने की बात भी हुई थी, मगर मामला आज तक अधर में है।
क्यूं हो रहे जानवर आक्रामक
जिला वन अधिकारी जोगा सिंह का कहना है कि जंगल खत्म होते जा रहे है। इसके चलते खाने के लिए बंदर या अन्य जानवर शहरों में आ रहे हैं और उन्हें खाने के लिए जंगल की तरह आहार नहीं मिल रहा है।
ऐसे में जो जानवर को मिलता है वह वहीं खा लेता है और आहार के आधार पर ही जानवर अपनी प्रवृत्ति बदल रहा है। बंदर के भी आक्रामक रूप धारण करने के पीछे यहीं सब कुछ है।
इसके अलावा बढ़ते तापमान के कारण बंदर और अन्य जानवर भी आक्रामक हो जाते है। इंसान की तरह उनका भी शांत स्वभाव गुस्सैल हो जाता है।