गंगा-जमुनी तहजीब की नजीर ऊंचा गांव स्थित जामा मस्जिद में देखने को मिली। रमजान के तीसरे रोजे को मुसलमानों ने गाय के दूध और खजूर से खोलकर सामाजिक समरसता का पैगाम दिया। साथ ही गो संरक्षण का संदेश दिया।
मुकद्दस रमजान का तीसरा रोजा मंगलवार को मुसलमानों ने बड़ी अकीदत के साथ रखा। सहरी से लेकर इफ्तार और तरावीह की नमाज तक इबादत का जो सिलसिला चला तो हर ओर नूरानियत का मंजर नजर आया। तपती गर्मी में भी भूख और प्यास के एहसास को भूलकर इबादत का दामन थामे रखा।
शाम को 7:15 पर जैसे ही मगरिब की अजान हुई। रोजेदारों ने गाय के दूध, खजूर, केले और शरबत से रोजा खोला। माइनॉरिटी वेलफेयर फाउंडेशन और जमीअत उलेमा हिन्द की ओर से इफ्तार पार्टी में मुसलमानों के साथ हिंदू भाइयों ने भी रोजा खोला।
मौके पर टीकाराम अधाना, सुनील अधाना, सतवीर यादव, सतीश अधाना, रणधीर यादव, शिराजुद्दीन प्रधान, चौ. शौकत खान सैफी, शेरखान मलिक, यासीन मलिक, हाफिज मोहम्मद शाबिर, मोहम्मद सेफुद्दीन, राजू खान और सत्तार नंबरदार सहित कई लोग मौजूद थे।