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मिड डे मील में निकला सांप, तीन छात्राएं हुईं बीमार और 70 हजार बच्चे रह गए भूखे

Mon, 15 May 2017 10:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
फरीदाबाद एनआईटी नंबर दो स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बृहस्पतिवार को आए मिड डे मील में सांप का बच्चा मिलने से हड़कंप मच गया। दर्जनभर छात्राओं को खिचड़ी परोसी जा चुकी थी।
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म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
इस बीच खिचड़ी के ड्रम में सांप का बच्चा दिखाई देते ही अफरातफरी मच गई। खिचड़ी खाने के बाद छह छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। प्रशासन के निर्देश पर छात्राओं को बीके सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को मिड डे मील का वितरण रोकने के आदेश जारी कर दिए। मौके पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने खिचड़ी के नमूने जांच के लिए सुरक्षित रखवा दिए। इस्कॉन फूड रिलीफ फाउंडेशन की तरफ से जिले के 350 से ज्यादा स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के 70 हजार से ज्यादा बच्चों को दोपहर का खाना उपलब्ध कराया जाता है। रोजाना की तरह बृहस्पतिवार सुबह करीब 11:15 बजे मिड डे मील वैन एनआईटी नंबर दो स्थित स्कूल पहुंची।
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म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
करीब 11:30 बजे मिड डे मील के तहत खिचड़ी बांटने का काम शुरू किया गया। लाइन में लगी 10-12 छात्राओं को खिचड़ी बांटी जा चुकी थी। इसी दौरान आठवीं कक्षा की छात्रा सोनिया ने टिफिन आगे बढ़ाया और उसे खिचड़ी परोस दी गई। टिफिन में परोसी गई खिचड़ी में सांप का बच्चा देख सोनिया की चीख निकल गई। खाना बांटने वाली कर्मचारी अंजु ने जैसे ही सांप के दो मुंहे बच्चे को देखा उसने सभी छात्राओं को खिचड़ी फेंकने के लिए कहा। जानकारी मिलते ही स्कूल की प्रधानाचार्या बृजबाला व अन्य शिक्षक मौके पर पहुंचे और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सूचित किया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कौर वर्मा, उप जिला शिक्षा अधिकारी शशि अहलावत और एनआईटी नंबर दो चौकी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। बताया जा रहा है कि स्कूल की 550 छात्राओं को मिड डे मील बांटा जाना था।

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म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
एडीसी ने दिए मेडिकल जांच के निर्देश
जिला प्रशासन को मामले की जैसे ही जानकारी मिली, अधिकारी हरकत में आ गए। बिना देरी किए अतिरिक्त उपायुक्त जितेंद्र दहिया ने खिचड़ी का स्वाद चखने वाली छात्रा कमला, अपूर्वा, आरती, हेमलता, मनीषा, अनुजा,  लक्ष्मी व कोमल सहित दर्जनभर छात्राओं को मेडिकल जांच के लिए तुरंत बीके सिविल अस्पताल ले जाने के निर्देश दिए। इसके अलावा छात्राओं को खिचड़ी वितरित होने से पहले जांच के तहत उसका स्वाद चखने वाली प्रधानाचार्या बृजबाला, शिक्षिका सुषमा, पुष्पा, रेखा व वितरक अंजु की भी जांच कराई गई। स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि एक छात्रा को स्कूल में ही उल्टियां होने लगी थीं, जबकि कोमल और लक्ष्मी नामक छात्रा को गले में दर्ज होने लगा था।
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लापरवाही आई सामने
सुबह करीब साढ़े 11 बजे खिचड़ी बांटनी शुरू हुई थी। दोपहर 12 बजे तक घटना की सूचना  पूरे शहर में आग की तरह फैल चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी छात्राओं को मेडिकल जांच के लिए दोपहर 2 बजे तक इंतजार करना पड़ा। बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रशासन ने एंबुलेंस का इंतजाम कराया और न ही मौके पर जांच के लिए डॉक्टरों की सुविधा मुहैय्या कराई। स्कूल प्रशासन की तरफ से ही जैसे-तैसे कर छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया।
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म‌ि - फोटो : अमर उजाला
सांप को बताया पालक का पत्ता
स्कूल प्रशासन ने जब इसकी जानकारी मिड डे मील उपलब्ध कराने वाली संस्था के प्रतिनिधियों को दी तो उन्होंने भी मामले को हल्के में लिया। संस्था के प्रतिनिधि का कहना था कि खिचड़ी में पालक का पत्ता होगा, जिसे आप लोग सांप समझ बैठे हैं। स्कूल प्रशासन ने जब सांप के बच्चे की पुष्टि की तो संस्था के प्रतिनिधियों के पसीने छूट गए। मामले की जांच सीएमओ कर रहे हैं। 120 डिग्री सेल्सियस टेंपरेचर में जहां खाना बनता है, उसमें सांप कैसे मिल सकता है। खिचड़ी में सांप नहीं था। किसी ने बेवजह अफवाह फैला दी है।-शिव दयाल, प्रतिनिधि-इस्कॉन फूड रिलीफ फाउंडेशन
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फरीदाबाद में मिड डे मील में सांप का बच्चा निकलने के बाद जिले के करीब 70 हजार विद्यार्थियों को भूखा रहना पड़ा। खाने के इंतजार में जब बच्चे भूख से बिलबिलाने लगे तो जिला शिक्षा विभाग ने एक से डेढ़ घंटे पहले ही बच्चों को छुट्टी कर घर भेज दिया। जिन स्कूलों में मिड डे मील बंटने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जिला शिक्षा विभाग ने उन स्कूलों बच्चों की स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मांगी। दोपहर करीब 11:15 बजे एनआईटी दो स्थित राजकीय स्कूल में मिड डे मील के तहत बांटी जा रही खिचड़ी में सांप का बच्चा निकलने के बाद आननफानन में जिला शिक्षा विभाग की तरफ से सभी स्कूलों में संपर्क साधा गया।

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म‌िड डे मील में म‌िला सांप का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों की तरफ से एक सर्कुलर भी सभी स्कूलों को जारी कर दिया गया, जिसमें उल्लेख किया गया था कि एहतियाती तौर पर किसी भी स्कूल में खिचड़ी न बांटी जाए। वहीं, इस घटना की जानकारी तुरंत व्हाट्सएप ग्रुप पर डाले जाने से सभी स्कूलों तक समय से सूचना पहुंच गई। मिड डे मील न मिलने से हजारों बच्चों को भूखा रहना पड़ा। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान चतर सिंह ने बताया कि कई स्कूलों ने तो मामले की जानकारी मिलते ही छुट्टी कर दी थी, ताकि बच्चों को परेशानी न उठानी पड़े। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला सचिव मुकेश गर्ग ने बताया कि शाम चार बजे तक स्कूलों ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधित जानकारी एकत्रित कर अधिकारियों तक पहुंचाई।

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बच्चों का हो रहा मोहभंग
बताया जा रहा है कि जिले के स्कूलों में वितरित होने वाला मिड डे मील कई बार कच्चा होने के साथ बेस्वाद भी होता है। ऐसे बच्चों की कमी नहीं है जो मिड डे मील पर निर्भर न रहकर घर से खाना लेकर जाते हैं। बताया जा रहा है कि स्कूलों में 65 से 70 फीसदी बच्चे भोजन को ग्रहण कर रहे हैं। सोमवार को चना-चावल, मंगलवार को मीठा दलिया, बुधवार को खिचड़ी, गुरुवार को दाल-रोटी, शुक्रवार को पुलाव एवं शनिवार को कढ़ी चावल का वितरण किया जाता है। इसमें चावल की मात्रा अधिक होने के कारण बच्चे मिड डे मिल से दूर भाग रहे हैं। वहीं,दलिया भी बच्चे पसंद नहीं कर रहे हैं।

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यह है नियम
कक्षा एक से पांच तक 4.13 रुपये एवं कक्षा छह से आठ में 6.18 रुपये की राशि मिड डे मिल के लिए प्रत्येक बच्चे के लिए निर्धारित है। प्राथमिक के छात्रों को 450 ग्राम कैलोरी एवं 12 ग्राम प्रोटीन तथा अपर प्राथमिक में 700 कैलोरी एवं 20 ग्राम प्रोटीन दिया जाना निर्धारित है। वर्तमान में बच्चे जो खाना पसंद ही नहीं कर रहे। ऐसे में पौष्टिकता हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है।
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7 बजे का तैयार भोजन बंटता है 12 बजे
इस्कॉन संस्था की तरफ से करीब भोजन तैयार किया जाता है। इसके लिए सुबह पांच बजे से तैयारी शुरू हो जाती है। वह भोजन दोपहर 12 बजे विद्यार्थियों तक पहुंचते पहुंचते ठंडा हो जाता है। वहीं उसका स्वाद भी बिगड़ जाता है। ऐसे में जिले के कई विद्यार्थियों का मिड डे मिल भोजन से मोहभंग हो चुका है।
संस्था की तरफ से बांटे जाने वाले भोजन की टेस्टिंग होनी चाहिए। दोपहर 12 बजे बंटने वाला भोजन सुबह 7 बजे तैयार हो जाता है। ऐसे में फूड पॉयजनिंग होने की संभावना रहती है। विभाग के अधिकारियों को मिड डे मिल के तहत अंतिम स्कूल की जांच करनी चाहिए कि बांटा गया भोजन कितना सही है। सूचना के अधिकार के तहत जवाब मांगा गया है।-रविंद्र चावला, शिक्षाविद्
मिड डे मिल के मामले समय समय पर सामने आ रहे हैं। इसके लिए इस्कॉन संस्था को शिकायत की जा रही है। इस मामले को विभाग के समक्ष रखा जाएगा।-राजसिंह, जिला प्रधान, हरियाणा विद्यालय अध्यपाक संघ
मामले की जांच की जा रही है। नमूने को लैब टेस्टिंग के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से भेजा गया है।-सतेंद्र कौर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद
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