दिवाली से पहले सोमवार को आसमान में स्मॉग की चादर छा गई, जिससे आबोहवा और खराब हो गई। सुबह के समय दृश्यता कम होने से वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया। जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक सोमवार शाम को बढ़कर 408 प्रति घनमीटर यानी बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया। लोगों की आंखों में जलन महसूस हुई। सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। दिवाली पर आतिशबाजी छोड़ने से हालत और अधिक बिगड़ सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुआल, कूड़ा और कोयला जलाने पर पूर्णतया रोक नहीं लगने पर सोमवार को दिवाली से पूर्व धुआं और धूल ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। इससे सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ गई। साथ ही आंखों में जलन और त्वचा रोग का खतरा बढ़ गया। स्मॉग में बनी सफेद चादर के चलते सुबह के समय दृश्यता कम हो गई, जिसके चलते वाहनों की गति कम हो गई और चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा।
जानकारी के अनुसार स्मॉग धुंध, कोहरा और धुंआ का मिश्रण है। इसको विशेषज्ञों ने स्मॉग (स्मॉक और फॉग का संयुक्त) नाम दिया है। यह कोहरे और धुंध से 10 गुना ज्यादा खतरनाक है। इससे हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इससे बचाव के लिए लोगों ने मास्क और चश्मा आदि का प्रयोग किया।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने के बाद ही स्मॉग से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। वहीं, पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन लोगों से पुआल, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्य न करने और इस बार धुआं रहित आतिशबाजी का प्रयोग कम करने की लोगों से अपील की। मौसम वैज्ञानिक विवेकराज का कहना है कि बारिश होने से स्मॉग की चादर हट सकती है। फिलहाल बारिश की संभावना बहुत कम है और अब लगातार तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के भी आसार बन रहे हैं।