दिल्ली-एनसीआर की हवा अब केवल सांसों के लिए ही खतरनाक नहीं, बल्कि जोड़ों और हड्डियों को भी गहराई से प्रभावित करने लगी है। जहरीली हवा में घुला पीएम 2.5 प्रदूषक धीरे-धीरे रूमेटॉइड अर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारक बनता जा रहा है।
इंडियन रूमेटोलॉजी एसोसिएशन (आईआरए) के 40वें वार्षिक सम्मेलन इराकोन 2025 के पहले दिन बृहस्पतिवार को द्वारका स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में विशेषज्ञों ने इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता का रूमेटिक बीमारियों, विशेष रूप से रूमेटॉइड अर्थराइटिस के बढ़ते मामलों से सीधा संबंध है। यह सम्मेलन 9 से 12 अक्तूबर तक चलेगा। इसमें देशभर से रूमेटोलॉजिस्ट, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि वायु प्रदूषण अब न केवल श्वसन और हृदय संबंधी रोगों की वजह बन रहा है, बल्कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित कर जोड़ों की बीमारियों को जन्म दे रहा है। यह चेतावनी सिर्फ मेडिकल समुदाय के लिए नहीं, बल्कि हर वर्ग के लोगों के लिए भी एक संदेश है कि हवा में छुपा जहर अब शरीर की हर हरकत को तकलीफदेह बना रहा है।
विशेषज्ञों ने बताया कि रूमेटॉइड अर्थराइटिस एक क्रोनिक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों पर हमला करती है, जिससे दर्द, सूजन और दिव्यांगता होती है। इस दौरान एम्स की रूमेटोलॉजी प्रमुख डॉ. उमा कुमार ने चेतावनी दी कि प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मामले बढ़ रहे हैं, खासकर उनमें जिनका कोई आनुवंशिक इतिहास नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदूषक सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ाते हैं, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली अतिसक्रिय हो जाती है।
अर्थराइटिस के मामले हो रहे अधिक गंभीर
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. पुलिन गुप्ता ने बताया कि प्रदूषित क्षेत्रों में रूमेटॉइड अर्थराइटिस के मामले न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि अधिक गंभीर भी हो रहे हैं। वहीं, एक निजी अस्पताल के रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. बिमलेश धर पांडेय ने बताया कि पीएम 2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रदूषक रूमेटॉइड अर्थराइटिस के जोखिम को बढ़ाते हैं और लक्षणों को गंभीर करते हैं। उन्होंने यूरोपियन मेडिकल जर्नल 2025 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए प्रदूषण और ऑटोइम्यून बीमारियों के बीच संबंध की पुष्टि की है।
रूमेटॉइड अर्थराइटिस के मामले बढ़ना खतरे की घंटी
सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. नीरज जैन ने कहा कि बिना पारिवारिक इतिहास वाले युवाओं में रूमेटॉइड अर्थराइटिस के मामले बढ़ना खतरे की घंटी है। डॉ. रोहिणी हांडा ने चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हुआ तो यह एक सामाजिक संकट बन जाएगा, जिससे स्वास्थ्य और उत्पादकता पर भारी बोझ पड़ेगा।