जल्द ऑटिज्म और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चे भी स्मार्टफोन और लैपटॉप का प्रयोग कर पाएंगे। स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2024 में युवा नवोन्मेषकों की एक टीम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित वर्चुअल रियलिटी फ्रेंड नामक उपकरण तैयार कर रही है।
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यह उपकरण ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों की 'मित्र' की तरह मदद करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैकाथॉन युवा नवोन्मेषक संवाद में यह विशिष्ट उपकरण बनाने वाली श्रीनगर स्थित एनआईटी की 'बिग ब्रेन्स टीम' से बात की।
टीम की सदस्य सईदा ने बताया कि सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के लिए 'वर्चुअल रियलिटी फ्रेंड' नामक उपकरण बना रहे हैं। यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों की मदद करेगा। विशेष बच्चे इस उपकरण का उपयोग संवाद कौशल संवर्धक के रूप में करेंगे। यह उपकरण विशेष बच्चों के 'मित्र' के रूप में काम करेगा। इससे वे स्मार्टफोन, लैपटॉप का उपयोग कर पाएंगे।
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एआई संचालित यह उपकरण वर्चुअल रियलिटी समाधान है, जो उन्हें भाषा सीखने या लोगों से बातचीत करने आदि जैसी उनकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में सहायता करेगा। टीम ने बताया कि एक सदस्य की रिश्तेदार ऑटिज्म से पीड़ित है, इसलिए उन्हें इन विशेष बच्चों की दिक्कतों के समाधान के लिए उपकरण बनाने की प्रेरणा मिली।
यमन के छात्र ने सरकार को धन्यवाद दिया
ऑटिज्म बच्चों की मदद के लिए उपकरण बनाने वाली टीम में यमन के छात्र मोहम्मद अली भी हैं। वे स्टडी इन इंडिया के तहत सीएसई में बीटेक करने भारत आए हैं। उन्होंने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी शानदार पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र को धन्यवाद दिया।
चुनौतियों से निपटने को अपग्रेड करना जरूरी
पीएम ने कहा, ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए नए समाधान आवश्यक होंगे। उनका समाधान लाखों बच्चों के लिए मददगार होगा। बेशक यह तकनीक भारत में बन रही है, लेकिन उसका वैश्विक स्तर पर प्रयोग होगा। पीएम ने पूरी टीम को उनके इस नए प्रयास के लिए बधाई दी है। साथ ही तकनीक को लगातार अपग्रेड करने का गुरुमंत्र भी दिया।
अब साइबर ठगी, ड्रोन या पक्षी की पहचान होगी
वर्ष 2023 में भारत में 7.3 करोड़ से अधिक साइबर हमले हुए हैं। साइबर हमलों में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। 'हैक ड्रीमर्स' टीम साइबर हमलों को रोकने के लिए तकनीक विकसित करने में जुटी है। ऐसे ही मस्टिक ओरिजिनल्स की टीम सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए माइक्रो डॉपलर आधारित लक्ष्य वर्गीकरण बना रही है।
यह सीमावर्ती क्षेत्रों, हवाईअड्डों जैसे संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और पक्षी को पहचानने में मदद करेगा, क्योंकि दूर से दोनों एक जैसे दिखते हैं। यह तकनीक फिंगरप्रिंट पर आधारित होगी। इसमें पंजों के निशान से पता लग जाया करेगा। पीएम ने युवा इनोवेटर्स से कहा कि तकनीक बेहद अहम है। लेकिन दुश्मन लगातार तकनीक का तोड़ निकालता है। इसलिए इन तकनीक का फायदा तभी होगा, जब लगातार इसको अपग्रेड किया जाए।
14 लाख विद्यार्थियों ने दिलाया 3,000 दिक्कतों का समाधान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा नवोन्मेषकों से अगले हैकाथॉन में वे वैश्विक समस्याओं के समाधान पर काम करने का आग्रह किया। स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के ग्रैंड फिनाले को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अभी तक सात संस्करणों में 65 हजार संस्थानों के 14 लाख विद्यार्थियों ने दो लाख टीम बनाकर करीब 3,000 दिक्कतों पर काम किया है। सैकड़ों नए स्टार्टअप आए हैं। वर्ष 2017 में अब तक छात्रों की तरफ से 7,000 से ज्यादा आइडिया समिट किए गए थे।
वर्ष 2024 में इनका आंकड़ा 57,000 पार कर गया है। इससे साफ होता है कि भारत का युवा किस तरह से अपने देश की चुनौतियों के लिए काम कर रहा है। हैकथॉन का सातवां संस्करण देशभर के 51 नोडल केंद्रों पर एक साथ शुरू हुआ है। सॉफ्टवेयर संस्करण 36 घंटे तक बिना रुके चलेगा, जबकि हार्डवेयर संस्करण 11 से 15 दिसंबर तक चलेगा। इन केंद्रों पर 1,300 से अधिक विद्यार्थियों की टीमें भाग ले रही हैं।