स्मार्ट सिटी की परीक्षा में गाजियाबाद 55 फीसदी नंबर भी हासिल न कर सका। अहमदाबाद, पुणे, और भुवनेश्वर जैसे विकसित और बेहतर संसाधनों वाले शहरों से मिली चुनौती में गाजियाबाद पिछड़ गया और पहले चरण की दौड़ से बाहर हो गया।
हालांकि नगर निगम के अफसर स्मार्ट सिटी प्रपोजल के दम पर स्मार्ट सिटी की पहली सूची में जगह बनाने का दावा कर रहे थे, लेकिन बृहस्पतिवार को जारी हुई सूची के बाद यह भ्रम भी टूट गया।
हालांकि गाजियाबाद को स्मार्ट सिटी लिस्ट में शामिल होने का दूसरा मौका मिलेगा। ऐसे में अब नगर निगम अधिकारी दूसरे चरण की परीक्षा में और मजबूत दावेदारी पेश करने की तैयारी करने का दावा कर रहे हैं।
स्मार्ट सिटी की दौड़ में गाजियाबाद यूपी के ही अन्य शहरों से भी काफी पीछे था। इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने बेहतर डीपीआर के दम पर स्मार्ट सिटी में जगह बनाने का दम भरा, लेकिन गाजियाबाद शहर 55 फीसदी अंक भी हासिल न कर सका।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने 55.47 फीसदी अंक हासिल करने वाले मध्य प्रदेश के भोपाल को स्मार्ट सिटी चुन लिया, लेकिन इससे कम स्कोर पाने वाले शहरों को पहले चरण की दौड़ से बाहर कर दिया। यानी गाजियाबादियों के लिए परिणाम अभी भी उम्मीदों के विपरीत ही रहा।
आर्थिक स्थिति
निगम अफसरों की मानें तो नगर निगमों की टैक्स कलेक्शन, अपने अन्य संसाधनों से आमदनी और आर्थिक स्थिति भी देखी गई। अहमदाबाद, पुणे जैसे नगर निगम की तुलना में गाजियाबाद की आमदनी 20 फीसदी भी नहीं है।
अब अप्रैल तक फिर मौका
बाहर हुए शहरों को अप्रैल के बाद नए वित्तीय वर्ष में फिर मौका मिलेगा। 40 सिटी की घोषणा जल्द होगी, जिसमें गाजियाबाद मजबूत दावेदारी पेश करेगा।
ये थे प्रस्ताव
नगर निगम और जर्मनी की कंसलटेंट फर्म के ज्वाइंट स्मार्ट सिटी प्रपोजल में 570 एकड़ क्षेत्र की रेट्रो फिटिंग कर सड़क, सीवर, बिजली, पानी, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी जैसे कई प्रपोजल शामिल थे।
पता चलेंगी कमियां
बाहर हुए शहरों को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय कमियां भी बताएगा, जिन्हें दूर कर दोबारा दावेदारी पेश करेंगे।