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...यहां बसता है छोटा दक्षिण भारत, अब लोगों को बेघर होने की फिक्र

Sun, 06 Sep 2020 06:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
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लाजपत नगर में रेलवे लाइन के किनारे बसी जलविहार मद्रासी कॉलोनी में रहने वाली ज्योति... - फोटो : अमर उजाला
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लगभग 40 साल से यहां रह रहे हैं। यहीं पर बाल-बच्चों का विवाह भी किया। छोटी सी जगह में ही सही लेकिन यहीं पर हमने पूरी गृहस्थी संजोकर रखी है। लेकिन जब से इस बात का पता चला है कि हमें यहां से हटा दिया जाएगा, दिल बैठा जा रहा है। कुछ सूझ नहीं रहा है कि आखिर कोरोना महामारी के इस दौर में बेघर हो जाएंगे तो कहां पनाह मिलेगी... लाजपत नगर में रेलवे लाइन के किनारे बसी जलविहार मद्रासी कॉलोनी की निवासी ज्योति ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ये बातें कहीं। 

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लाजपत नगर में रेलवे लाइन के किनारे लगभग एक किलोमीटर तक करीब 10 हजार झुग्गियां हैं। इसे एक तरह से छोटा दक्षिण भारत माना जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां की झुग्गियों में अधिकतर लोग तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक से आकर बसे  हैं। हर राज्य के लोगों की अपनी अलग कॉलोनी है।  कई लोग 40 साल से यहीं रह रहे हैं। इनका अपने मूल निवास स्थान से पूरी तरह नाता समाप्त हो चुका है। 

स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि उनके पिताजी ने रेलवे लाइन के किनारे झुग्गियां बनाई थी। वह भी पिछले 15 साल से फल व सब्जियों का ठेला लगाकर किसी तरह बच्चों का पेट पाल रहे हैं। लेकिन यदि बेघर हो जाएंगे तो अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। कुक्कू स्वामी ने बताया कि 15 साल पहले वह चेन्नई से आकर यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर बच्चों को भी पता है कि कब कौन सी ट्रेनें यहां से गुजरती हैं। ट्रेन आने पर रेलवे की पटरियों के आसपास कोई नजर नहीं आता। लेकिन सरकार ने यदि उन्हें हटाने का मन बना ही लिया है, तो उनकी इतनी गुजारिश है कि कम से कम कोरोना काल में उन लोगों को यहां रहने दिया जाय। 
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पुनर्वास की व्यवस्था कराए सरकार 
रमेश ने बताया कि लोगों के पास वैध मतदाता पहचान पत्र व राशनकार्ड मौजूद है। वर्षों से वह दिल्ली में वोट देते आ रहे हैं। स्थानीय नेताओं ने घर पर आकर उनका यह जरूरी कागजात बनवाया था। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें उजाड़ने से पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था कराए। ज्योति ने बताया कि बीते दो दिन से स्थानीय नेता कॉलोनी में आ रहे हैं। इन्होंने झुग्गी वासियों को दिलासा दिया है कि यहां से हटाए जाने के बाद उन्हें दूसरी जगह पर बसाया जाएगा। लेकिन जब से लोगों को पता चला है कि उन्हें यहां से हटा दिया जाएगा, सबकी नींद गायब है। 

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