दिल्ली के छोटे दुकानदारों को दुकानों से निकाले जाने का खतरा मंडराने लगा है। पगड़ी देकर दुकान किराए पर लेने वाले करीब चार लाख व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। छोटे दुकानदारों से जुड़े व्यापारिक संगठन ने दिल्ली किराया कानून में 15 दिनों के अंदर संशोधन की मांग करते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वोटिंग में किसी पार्टी को वोट न देकर नोटा का बटन दबाएंगे।
राजधानी पगड़ी किराएदार संगठन के प्रवक्ता रामभक्त अग्रवाल और उपाध्यक्ष नरेश चावला ने कहा कि संगठन के सदस्यों ने संवाददाताओं से बताया कि अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के सांसदों, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित केंद्रीय मंत्री से भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
कई बार भरोसा भी दिया गया, लेकिन अब तक दुकानदारों के हक में फैसला नहीं आया। सैकड़ों दुकानदार अपनी रोजी-रोटी छिन जाने की वजह से तनावग्रस्त हैं जबकि इसका असर कर्मियों पर भी पड़ रहा है। ऐसे हालात को देखते हुए सभी व्यापारी संघों की मांग है कि इस बजट सत्र में सरकार तत्काल एक संशोधन विधेयक/बिल पारित करें। अगर बिल पास नहीं किया गया तो अध्यादेश के जरि, व्यापारियों को राहत मिलनी चाहिए। ऐसा न होने पर दिल्ली के सभी व्यापारी वोट नहीं देने पर मजबूर हो जाएंगे।