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Delhi NCR News: सिंगल विंडो में सुधार की सुस्ती उजागर, लंबित कामों में दिल्ली सबसे पीछे

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नियमों को आसान बनाने और सरकारी मंजूरियों में लगने वाले समय को कम करने के मामले में अंतिम पायदान पर
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95 सेवाओं की समीक्षा में 68 की समय-सीमा घटाने का प्रस्ताव, लेकिन कई प्रक्रियाओं का नया खाका अब भी अधूरा

धनंजय मिश्रा

नई दिल्ली। दिल्ली में कारोबार शुरू करने, निर्माण कराने और सरकारी मंजूरियां लेने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए लागू सिंगल विंडो व्यवस्था में सरकारी विभागों की सुस्ती सामने आई है। दिल्ली सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की गत जून की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली सभी केंद्रशासित प्रदेशों में लंबित और शुरू नहीं किए गए सुधार कार्यों के मामले में सबसे पीछे पाई गई।
समीक्षा का उद्देश्य सरकारी मंजूरियों में लगने वाले कुल समय को कम करना था। इसमें सामने आया कि ज्यादातर विभागों ने सेवाओं के अलग-अलग चरणों के लिए समय-सीमा निर्धारित ही नहीं की थी। इसके बाद विभागों ने प्रक्रियाओं की समीक्षा कर नई समय-सीमा और कार्यप्रणाली तैयार की। एक जून तक सिंगल विंडो सिस्टम पर 95 सेवाएं उपलब्ध थीं। समीक्षा के बाद 68 सेवाओं की समय-सीमा घटाने का प्रस्ताव किया गया, जबकि आठ में समय बढ़ाया गया। 11 सेवाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया। पांच सेवाएं दोहराव वाली, लागू न होने वाली या दूसरे विभागों को हस्तांतरित पाई गईं। तीन सेवाओं के लिए पहली बार समय-सीमा तय की गई।
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एमसीडी के तीन अहम सेवाओं का सुधार अधूरा
दिल्ली नगर निगम की सेवाओं की समीक्षा में भी प्रक्रियागत कमियां सामने आईं। कुछ सेवाओं की समय-सीमा में बदलाव प्रस्तावित होने के बावजूद उनकी नई कार्यप्रणाली का खाका रिपोर्ट तैयार होने तक उपलब्ध नहीं था। भवन का नक्शा ऑनलाइन स्वीकृत करने की सेवा में मौजूदा 59 दिन की समय-सीमा को बरकरार रखा गया है, जबकि नई कार्यप्रणाली का खाका लंबित है। नगर नियोजन की ऑनलाइन स्वीकृति में आवेदन को स्थायी समिति के समक्ष रखने की प्रक्रिया के लिए 90 दिन की समय-सीमा दर्ज है और इसका नया खाका भी लंबित है। संपत्ति कर के दाखिल-खारिज में 2019 से पहले की संपत्तियों के लिए मौजूदा औसत समय 45 दिन से घटाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव है, लेकिन इसकी नई कार्यप्रणाली भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
21 दिन का दावा, अपनी ही फाइल में 37 दिन का हिसाब
श्रम विभाग ने कारखाना लाइसेंस के पंजीकरण और जारी करने की समयसीमा 30 से घटाकर 21 दिन करने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन रिपोर्ट में दर्ज चरणवार समय सीमा इससे मेल नहीं खाती। विभाग के अनुसार आवेदन और दस्तावेज जमा करने में सात दिन, दस्तावेज सत्यापन में सात दिन, मौके की जांच और रिपोर्ट में 13 दिन तथा अंतिम मंजूरी में 10 दिन लगेंगे। इन चार चरणों का कुल समय 37 दिन बैठता है, जबकि प्रस्तावित समय सीमा 21 दिन है। वहीं यात्री लिफ्ट चलाने का लाइसेंस जारी करने की समय सीमा 45 से घटाकर 15 दिन करने का प्रस्ताव है। इसके चार जांच चरणों के लिए क्रमश: दो, दो, नौ और दो दिन तय किए गए हैं, जो कुल 15 दिन होते हैं।
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सिंगल विंडो में भी पूरी प्रक्रिया का हिसाब नहीं
रिपोर्ट में सरकार ने माना है कि मौजूदा सिंगल विंडो सिस्टम मंजूरी के अलग-अलग स्तरों का समय दर्ज करती है, लेकिन आवेदन से अंतिम मंजूरी तक पूरी प्रक्रिया में लगे कुल समय की स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध नहीं है। सुधार के तहत आवेदन से निर्माण शुरू करने की अंतिम मंजूरी और निर्माण के बाद कारोबार शुरू करने की अंतिम मंजूरी तक लगे कुल समय को दर्ज कर उसकी निगरानी करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके अलावा आवेदन के दौरान उठने वाली आपत्तियों, उनके सामान्य कारणों और खारिज किए गए आवेदनों के कारणों का भी विश्लेषण किया जाना है।
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