इंटरनेट आधारित कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह में सबसे बड़ा रोड़ा डेटा आदान प्रदान (इंटरनेट) की धीमी गति है। नागरिकों का डेटा बेस तैयार करने वाला आधार (यूआईडीएआई) जहां 500 मेगाबाइट प्रति सेकेंड (एमबीपीएस) की इंटरनेट गति पर काम कर रहा हैं वहीं अधिकतर बैंक 128 किलोबाइट प्रति सेकेंड (केबीपीएस) से 512 केबीपीएस (एक हजार गुना कम) की रफ्तार पर काम कर रहे हैं। इंटरनेट की गति कम होने से ट्रांजेक्शन फेल, हैंग, हैकिंग, टाइम आउट आदि समस्या आ रही हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012-13 में देश में कुल 89 सार्वजनिक और निजी सेक्टर के बैंक हैं। इनकी देश भर में 92114 शाखाएं थीं। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश भर में 2,32,294 एटीएम हैं जबकि 12,20,763 प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें हैं, बताते चलें कि साइट के मुताबिक प्रति सेकेंड करीब तीन से चार पीओएस एनपीसीआई से जुड़ रही हैं। कैशलेस अर्थव्यवस्था में डेटा और सूचना आदान प्रदान के लिए प्रमुख आवश्कता इंटरनेट है।
बताते चलें कि अधिकतर बैंकों को भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) या एमटीएनएल ने इंटरनेट लाइन लीज पर दे रखी हैं। बीएसएनएल से मिले आंकड़ों से मुताबिक अधिकतर बैंक इंटिग्रेटेड सर्विस डिजिटल नेटवर्क (आईएसडीएन) जिसमें कॉलिंग और डेटा सेवा एक साथ होती है से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आईएसडीएन में इंटरनेट की अधिकतम गति 128 किलोबाइट प्रति सेकेंड (केबीपीएस) होती है। बीएसएनएल अधिकारियों के मुताबिक इतनी गति से इंटरनेट पर दो से तीन कंप्यूटर ही चल सकते हैं, यदि कनेक्शन बढ़ाए गए तो नेटवर्क स्लो यहां तक हैंग भी हो सकता है।
देश में सबसे अधिक शाखा और एटीएम वाला भारतीय स्टेट बैंक दो मेगाबाइट प्रति सेकेंड (एमबीपीसी) यानी आईएसडीएन से बीस गुना ज्यादा गति से चलता है। इस गति पर बैंक की सभी शाखाओं के कंप्यूटर और सर्वर तो चल सकते हैं लेकिन मोबाइल, नेटबैंकिंग, पॉस मशीन आदि इस्तेमाल होने पर समस्या आएगी। देश के अन्य बैंक तो बहुत ही कम गति इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं ऐसे में उनके सर्वर पर यह समस्या और ज्यादा होगी।
क्या है गति का खेल
इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) एक्सपर्ट सागर रत्रा के मुताबिक इंटरनेट गति का मतलब है कि प्रति सेकेंड कितने बाइट का आदान प्रदान हो रहा है। गति जितनी ज्यादा होगी उतना ही ज्यादा आंकड़े का आदान प्रदान हो सकेगा। उदाहरण के तौर पर एक एमबीपीएस की गति पर सौ लोग दस सेकेंड में कैशलेस आदान प्रदान कर सकते हैं। यदि दस हजार लोग एक ही समय पर ट्रांजेक्शन करेंगे तो डेटा सभी में बराबर बंटेगा इसमें दस सेकेंड में होने वाला काम बीस मिनट तक लटक सकता है। दूसरे यह भी हो सकता है कि पहले सौ लोगों को सेवा मिले बाकी लोग सर्वर से जुड़ ही नहीं सकेंगे।
धीमा इंटरनेट एटीएम सुरक्षा में भी बाधा
अधिकतर बैकों ने बायोमेट्रिक पहचान वाले एटीएम लगा रखे हैं लेकिन यह सुविधा किसी ने शुरू नहीं की है। इसके पीछे भी धीमी इंटरनेट गति है। बीएसएनएल जीएम कौसर खान के मुताबिक अधिकतर एटीएम 128 केबीपीएस की इंटरनेट गति से चलाए जाते हैं। इस गति पर मशीन के बेसिक फीचर यानी पिन नंबर का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। पिन की जगह फिंगरपि्रंट या ओटीपी आधारित ट्रांजेक्शन के लिए कम से कम एक एमबीपीएस की गति चाहिए। यही वजह है कि हाई सिक्योरिटी फीचर होने के बावजूद एटीएम में यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।
अधिकतर बैंकों को बीएसएनएल-एमटीएनएल ने इंटरनेट लाइन लीज की है। सबसे ज्यादा 2 एमबीपीएस का कनेक्शन एसबीआई ने लिया है, पीएनबी भी अपने को 2 एमबीपीएस में अपग्रेड कर रहा है, बाकी अधिकतर बैंक आईएसडीएन पर काम कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में तो हालत और भी बदतर है यहां तो 56 केबीपीएस से काम चलाया जा रहा है।
-कौसर खान जीएम, बीएसएनएल, फरीदाबाद