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NCR : फरीदाबाद में स्काईवॉक की स्लैब टूटी, सोसाइटी में 14वीं मंजिल से गिरकर बुजुर्ग की मौत

Wed, 25 Jun 2025 06:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद

सार

बुजुर्ग स्काईवॉक में  रखे गमलों में पानी डालने के लिए जा रहे थे। उसी समय अचानक स्काईवॉक की स्लैब टूट गई और बुजुर्ग नीचे गिर गए। हादसे में उनकी दर्दनाक मौत हो गई। 
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इसी स्काईवॉक से गिरकर हुई बुजुर्ग की मौत... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेक्टर-88 की आरपीएस सवाना सोसाइटी में मंगलवार सुबह बुजुर्ग की 14वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई। बुजुर्ग स्काईवॉक में  रखे गमलों में पानी डालने के लिए जा रहे थे। उसी समय अचानक स्काईवॉक की स्लैब टूट गई और बुजुर्ग नीचे गिर गए। हादसे में उनकी दर्दनाक मौत हो गई। 

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एसबीआई से सेवानिवृत्त कुलवंत सिंह सेक्टर-88 की सवाना सोसाइटी के टी-8 टावर में फ्लैट नंबर 1407 में रहते थे। कुलवंत के साथ उनका बेटा हर्ष और पत्नी आशा भी रहती थीं। सोसाइटी के गार्ड ने घटना की जानकारी बेटे हर्ष को दी। दर्दनाक हादसे को देखकर बेटे की भी चीख निकल गई। 

उनके सामने उनके रिश्तेदार सुनील कपूर का फ्लैट है। सुनील कपूर के अनुसार कुलवंत सिंह प्रतिदिन स्काईवॉक में रखे गमलों में पानी डालते थे। मंगलवार सुबह लगभग 8 बजे भी वो गमलों में पानी डालने के लिए टी-8 टावर से टी-7 टॉवर की ओर गए। 
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टी-7 टावर के पास जाते ही स्काईवॉक में लगी स्लैब टूटकर गिर गई और बुजुर्ग नीचे गिर गए। नीचे गिरते हुए वो पहली मंजिल पर बने स्काईवॉक की ग्रिल से टकरा गए। यह ग्रिल भी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। पहली मंजिल की स्काईवॉक में लगे सभी स्लैब टूटे चुके हैं। केवल दोनों ओर की ग्रिल ही बची हुई है। ग्रिल से टकराने के चलते उनके शरीर से गर्दन और हाथ-पैर कट गए। 

सोसाइटी के गार्ड ने हादसे की जानकारी बेटे हर्ष को दी। दर्दनाक हादसा देख सोसाइटी के लोग बेहद घबरा गए। सूचना पुलिस को दी गई। जिसके बाद बीपीटीपी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को बादशाह खान अस्पताल के शवगृह में रखवाया। पुलिस के अनुसार परिजनों की ओर से इस मामले में कोई शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत आएगी तो उसके नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्काईवॉक के नीचे लगी होनी चाहिए जाली  
सेवानिवृत्त चीफ टाउन प्लानर सुधीर चौहान ने बताया कि स्काईवॉक बनाने के कई नियम होते हैं। यदि कोई भी बिल्डर स्काईवॉक बनाता है तो नेशनल बिल्डिंग कोड व हरियाणा बिल्डिंग कोड के तहत स्काईवॉक 24 मीटर ऊंचाई पर होना चाहिए। इसके अलावा स्काईवॉक पर चलने के दौरान कोई गिर न जाए, इसके लिए साइडों में 6 फीट ऊंची ग्रिल लगाना जरूरी है। इसके अलावा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्काईवॉक के नीचे उसकी चौड़ाई से अधिक चौड़ाई की जाली भी लगाना चाहिए ताकि कोई गिरे तो वो नीचे जाने की बजाय उस जाली में ही गिर जाए और जान बच जाए।

यह होता है स्काईवॉक  
किसी सोसाइटी के दो टॉवरों में या अगल-बगल मौजूद दो हाईराइज बिल्डिंगों की ऊपर की मंजिलों को आपस में आवागमन के लिए जोड़ने के लिए स्काईवॉक बनाया जाता है। ये 24 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों पर बनाया जाता है।

इससे दोनों टॉवर के लोगों को यदि एक-दूसरे टॉवर में आना-जाना हो तो वे ग्राउंड फ्लोर पर आकर दूसरे टॉवर में जाने की बजाय अलग-अलग मंजिल पर बने स्काईवॉक के जरिये एक-दूसरे में आ-जा सकते हैं। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ये बनाए जाते हैं। लोग स्काईवॉक को और खूबसूरत बनाने के लिए कई बार पौधों से सजा देते हैं। 

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