जामिया नगर में रहने वाली गजल परवीन ने बताया कि दिल्ली लौट कर काफी खुश है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है। हमेशा डर लगा रहता था कि कभी भी कुछ हो सकता है। इसी बीच भारतीय दूतावास से मदद की जानकारी मिली। इसके बाद तुरंत ईरान की उर्मिया मेडिकल यूनिवर्सिटी से निकालने का प्रयास शुरू हो गया। वहां से सुरक्षित निकाल कर आर्मेनिया पहुंचे, जहां उन्हें राजधानी येरेवन के होटलों में ठहराया गया। बाद में इंडिगो की एक फ्लाइट आर्मेनिया के येरेवन एयरपोर्ट से इन छात्रों को लेकर कतर की राजधानी दोहा के लिए रवाना हुई थी। उसके बाद इसके बाद दोहा से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट आए।
वहीं त्रिलोकपुरी में रहने वाली मरियम रोज ने कहा कि हम लोग जहां पर रुके हुए थे। इंटरनेट न होने के कारण ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन सूचना मिल रही थी कि ईरान के हालात काफी खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय एंबेसी ने उन्हें ईरान से निकलने के लिए तुरंत व्यवस्था की बस के माध्यम से आर्मेनिया लाए गए। उसके बाद दोहा के रास्ते भारत पहुंचे। वहीं अन्य छात्रों ने बताया कि ईरान के अलग-अलग शहरों से भारतीय छात्र आर्मेनिया से लगे नॉरदुज बॉर्डर पहुंचे। यहां से इन्हें बस से आर्मेनिया के येरेवन एयरपोर्ट ले जाया गया। इसके बाद इन छात्रों को हवाई रूट से भारत लाया जा रहा है।
आईजीआई तीन पर बनाया गया है विशेष कार्यालय
किसी भी आपदा से निपटने के लिए इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर एकीकृत कमान केंद्र बनाया गया है। नई दिल्ली के डीएम सन्नी सिंह के नेतृत्व में एसडीएम प्रतीक राज यादव ने इस आपदा प्रतिक्रिया शाखा को देख रहे हैं। इस केंद्र पर गुरुवार सुबह 3:40 बजे नई दिल्ली के जिला परियोजना अधिकारी डॉ. विनोद भारद्वाज ने दिल्ली के सभी छह छात्रों को रिसीव किया और सकुशल उनके माता को सौंप दिया।