पिछले साल नवंबर में पुराना ऑटो बेचकर डीजल वाला नया ऑटो किश्तों पर ले लिया। ऑटो की कमाई से ही बैंक की किश्त भी जाने लगी कि अचानक मार्च में लॉकडाउन हो गया। दो महीने पहले लॉकडाउन खुला तो उम्मीद जगी। कंपनी में दोबारा संपर्क किया तो पता चला कि कंपनी मालिक को उससे सस्ते में सीएनजी वाला ऑटो मिल गया तो उन्होंने उसे हटा दिया।
स्कूल अभी तक खुले नहीं हैं जो वहां से आमदनी का जरिया बने। इस पर उन्होंने सवारी बैठाना शुरू किया। विजय ने बताया कि कई दिन देखा, मगर लोग ऑटो में सफर करने से परहेज कर रहे हैं। एक दिन तो सिर्फ 10 रुपये ही कमाए तो सवारी बैठाना भी बंद कर दिया।
ऐसे में अब गुजर बसर करने के लिए विजय ने फ्रूट गार्डन में सड़क किनारे ऑटो लगाकर उसमें चिप्स, कोल्ड ड्रिंग, मास्क आदि सामान बेचना शुरू कर दिया। विजय ने बताया कि अब बिना डीजल फूंके दिनभर में दो-तीन सौ रुपये कमा लेते हैं, जो पहले दिनभर सवारी के लिए सड़क पर डीजल फूंकने के बाद भी नहीं मिल रहे थे।
हालांकि विजय ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। विजय ने अपने ऑटो के दोनों तरफ मोबाइल नंबर लिखकर किराए के लिए संपर्क करें लिखा हुआ है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा।