फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना के 6 माह: स्कूल बंद हुए तो ऑटो में खोल दी दुकान, नहीं मिलीं सवारियां तो बेचने लगे सामान

Sat, 05 Sep 2020 06:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमित भाटिया, अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
स्कूल बंद हुई तो ऑटो में लगाई दुकान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन के कारण बहुत से लोगों के रोजगार पर संकट आ गया। किसी की नौकरी छूट गई तो किसी का काम बंद हो गया। ऐसे ही एनआईटी 5 निवासी एक ऑटो का भी सारा काम चौपट हो गया।

विज्ञापन


ऑटो चालक विजय स्कूल के बच्चों और एक कंपनी के कर्मचारियों को लाने ले जाने का काम करते थे। कोरोना के कारण स्कूल-कॉलेज बंद हैं। वहीं कंपनी खुली, मगर संचालक ने कम पैसों में दूसरा ऑटो लगवा लिया।

इस पर उन्होंने सवारियां बैठाना शुरू किया, मगर आशानुरूप सवारियां नहीं मिली। ऐसे में अब विजय ने अपने नए ऑटो को सड़क किनारे खड़ा करके चिप्स-कोल्ड ड्रिंक बेचना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


मूलरूप से मैनपुरी, उत्तर प्रदेश निवासी विजय कुमार पिछले करीब 10-11 साल से फरीदाबाद में रह रहे हैं। विजय ने बताया कि वह काम की तलाश में यहां आए थे। एनआईटी-5 डी ब्लॉक में एक खाली घर की देखरेख व चौकीदारी की जिम्मेदारी मिली तो रहने को छत मिल गई। साथ ही एक कंपनी में नौकरी मिल गई थी।

सब ठीक चल रहा था, मगर अचानक छह साल पहले नौकरी छूट गई। परिवार का गुजर करने के लिए एक ऑटो ले लिया। सुबह पहले स्कूल के बच्चों को छोड़ने जाते और उसके बाद सेक्टर-25 स्थित एक कंपनी के कर्मचारियों को छोड़कर आते थे।

इसी तरह दोपहर को स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़कर शाम को कंपनी के कर्मचारियों को उनके घर छोड़ते थे। इस तरह परिवार का गुजर बसर अच्छे से हो रहा था।

विज्ञापन

नवंबर में ही लिया था नया ऑटो और...

पिछले साल नवंबर में पुराना ऑटो बेचकर डीजल वाला नया ऑटो किश्तों पर ले लिया। ऑटो की कमाई से ही बैंक की किश्त भी जाने लगी कि अचानक मार्च में लॉकडाउन हो गया। दो महीने पहले लॉकडाउन खुला तो उम्मीद जगी। कंपनी में दोबारा संपर्क किया तो पता चला कि कंपनी मालिक को उससे सस्ते में सीएनजी वाला ऑटो मिल गया तो उन्होंने उसे हटा दिया।

स्कूल अभी तक खुले नहीं हैं जो वहां से आमदनी का जरिया बने। इस पर उन्होंने सवारी बैठाना शुरू किया। विजय ने बताया कि कई दिन देखा, मगर लोग ऑटो में सफर करने से परहेज कर रहे हैं। एक दिन तो सिर्फ 10 रुपये ही कमाए तो सवारी बैठाना भी बंद कर दिया। 

ऐसे में अब गुजर बसर करने के लिए विजय ने फ्रूट गार्डन में सड़क किनारे ऑटो लगाकर उसमें चिप्स, कोल्ड ड्रिंग, मास्क आदि सामान बेचना शुरू कर दिया। विजय ने बताया कि अब बिना डीजल फूंके दिनभर में दो-तीन सौ रुपये कमा लेते हैं, जो पहले दिनभर सवारी के लिए सड़क पर डीजल फूंकने के बाद भी नहीं मिल रहे थे।

हालांकि विजय ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। विजय ने अपने ऑटो के दोनों तरफ मोबाइल नंबर लिखकर किराए के लिए संपर्क करें लिखा हुआ है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें