पूछताछ में बदमाशों से पता लगा कि ग्राहकों की समस्या निवारण में मदद करने के लिए गूगल सर्च इंजन भुगतान सेवा लाइसेंस पर पंजीकरण करके अनोखे तरीके से ये बदमाश काम कर रहे थे। बदमाशों ने खोज परिणाम के शीर्ष स्थान पर रखकर अपनी उपस्थिति बढ़ाई थी, जिससे उनके जाल में फंसने वाले विदेशियों को उन पर यकीन हो जाता था। ये आरोपी खुद को गूगल, आईफोन और फेसबुक को टेक्निकल सपोर्ट देने के नाम पर लोगों को फंसाते थे।
इंटरनेशनल गेटवे के जरिये उपलब्ध करवाए गए नंबर पर पीड़ितों को इसलिए शक नहीं होता था क्योंकि गूगल सर्च में आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराया गया नंबर टॉप सर्च में शामिल होता था। इसके बाद जब ग्राहक दिए गए ग्राहक सेवा नंबर पर कॉल करता, तो विदेश में स्थित अपने बदमाशों को जाल में फंसने वाले लोगों की पूरी जानकारी भेज देते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाले टेलीकॉलर और सुपरवाइजर के रूप में काम करने वाले बदमाश ग्राहक को गूगल प्ले कार्ड खरीदने का लालच देते थे और उनके तकनीकी मुद्दों को ठीक करने के बहाने बैंक खाता संख्या सहित अन्य विवरण ले लेते थे।
इसके बाद ग्राहक को दिए गए गूगल प्ले कार्ड का सुरक्षा कोड ब्लॉकर को दिया जाता था, जो उसे ऊंची दर पर बेचने का काम करता था। भारत या विदेश में कहीं से बैठकर खातों से पैसा निकालने के साथ प्ले कार्ड को बेचने के बाद चीन से ऑनलाइन भुगतान अवैध तरीकों से इन बदमाशों को भेजा जाता था। जब तक पीड़ितों को अपने खातों में हुई ठगी का पता लगता था, तब तक ये गायब हो जाते थे।