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सीता से बोले हनुमान- अंजना माता, पवन मेरे पिता का नाम है

Mon, 19 Oct 2015 06:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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राम-लक्ष्मण सीता की खोज में किष्किंधा पर्वत की ओर चलते हैं, जहां उनकी मुलाकात हनुमान से होती है। वह राम को सुग्रीव व अन्य वानरसेना से मिलवाते हैं।
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मंत्रणा के बाद हनुमान सीता की खोज में लंका जाते हैं। समुद्र पार कर वह अशोक वाटिका पहुंचते हैं और राम द्वारा दी गई मुद्रिका को सीता के सामने गिराते हैं।

राम की मुद्रिका देखकर सीता हर्षित हो जाती है और वह इस भ्रम में पड़ती हैं कि उस मुद्रिका को लाया कौन। उन्हें व्याकुल देखकर हनुमान वृक्ष से नीचे आते हैं और अपना परिचय देते हुए कहते हैं कि ‘अंजना माता, पवन मेरे पिता का नाम है, ईष्ट हैं माता मेरा, तेरा पति जो राम हैं।
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लोग इस संसार के हनुमान कहते हैं मुझे, क्या खबर वो क्यूं महा बलवान कहते हैं मुझे। फिर सीता कहती हैं कि इसमें अंकित नाम है मेरे पति भगवान का, अब असंभव है भला क्या दूं सिला ऐहसान का। जो बना रक्षक है जाति जानकी की जान का, मैं करूं धन्यवाद कैसे बीरबल हनुमान का।

दोनों में परिचय होने के बाद हनुमान सीता से अनुमति लेकर फल खाने चले जाते हैं। अशोक वाटिका में फल खाने के दौरान हनुमान पेड़ की डालियों को तोड़कर तहस-नहस कर देते हैं।

वहां से कुछ रखवाले भागकर रावण के दरबार में पहुंचकर इसकी जानकारी देते हैं। रावण अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजता है। अक्षय कुमार का हनुमान वध कर देते हैं।
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यह समाचार पाकर रावण मेघनाद को भेजता है। गर्जना के साथ मेघनाद अशोक वाटिका पहुंचता है और ब्रह्मास्त्र से बांधकर रावण के दरबार में ले जाने का मंचन किया गया। अक्षय कुमार का रोल रोहतास सैनी और मेघनाद का रोल विजय कुमार कंटा ने अदा किया है।
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