84 के दंगे देश के इतिहास में सबसे ज्यादा शर्मनाक थे। एक समुदाय के साथ नाइंसाफी रही है कि 34 साल बाद भी गरीब मासूमों को इंसाफ के लिए भटकना पड़ रहा है। दंगों के मामले में दो दोषियों को सजा मिलने पर अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की टॉप लीडरशिप के आदेश पर ही दंगे हुए, ऐसे में सोनिया गांधी व राहुल गांधी का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाया जाए।
सुखबीर सिंह बादल व हरसिमरत कौर ने संवाददाता सम्मेलन ने कहा कि 34 साल से पीड़ित इंसाफ के लिए भटक रहे हैं। बार-बार कांग्रेस के दबाव में केस बंद कर दिए जाते हैं, यह मामला भी पांच बार बंद किया गया। इस मामले में सजा से नया मोड़ आया है और यह शुरुआत है। अब सज्जन कुमार, टाइटलर जैसे बड़े नेता भी सजा से दूर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के घर ही दंगों का षड्यंत्र रचा गया था, यही कारण है कि दंगों को रोकने के लिए सेना तक नहीं बुलाई गई। ऐेसे में वे मांग कर रहे हैं कि सोनिया गांधी व राहुल गांधी का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाया जाए, क्योंकि वे उस समय इसी घर में थे।
उन्होंने कहा कि सज्जन कुमार को तो गवाह ने अदालत में पहचान भी लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हमारे आग्रह पर एसआईटी का गठन किया और उसका नतीजा सामने है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं।
उन्होंने सभी गवाहों से अपील की कि वे डर से बाहर आएं और अदालत में जाकर बिना डरे गवाही दें, पूरी कौम व अकाली दल (बादल) उनके साथ है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व सरकार से आग्रह किया है कि सभी दंगों के मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष अदालत का गठन किया जाए और छह माह में सभी मामलों का निपटारा किया जाए।
इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके, महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा, पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह हित, कमेटी लीगल सेल के चेयरमैन जसविंदर सिंह जोली व दंगा पीड़ित परिवारों के सदस्य उपस्थित थे।