आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली सरकार और एमसीडी समेत भाजपा शासित राज्यों की शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए दिल्ली प्रदेश भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। साथ ही भाजपा को दिल्ली के शिक्षा मॉडल से तुलना करने की चुनौती दी है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को पार्टी दफ्तर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि फिलवक्त दिल्ली में दो तरह के शिक्षा मॉडल चल रहे हैं। बीते पांच साल का दिल्ली सरकार का मॉडल और दूसरा तीसरी बार एमसीडी पर शासन कर रही भाजपा का मॉडल।
बीते पांच सालों में आप सरकार ने स्कूलों में इस कदर सुविधाएं बढ़ाई है कि करीब 1.36 लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला करवा लिया। उधर, एमसीडी के स्कूल बंद हुए हैं, बल्कि बीते पांच सालों एमसीडी स्कूल में 1.30 लाख बच्चों की संख्या घट गई है।
सिसोदिया का दावा है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में बीते पांच साल में 20 हजार क्लास रूम बनने के साथ 25 नए स्कूल खुले। वहीं, स्कूल ऑफ एक्सलेंस की संख्या भी 6 हुई है। दूसरी तरफ बीते नौ सालों में एमसीडी के 109 प्राइमरी स्कूल बंद हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब की शिक्षा से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे।
उपमुख्यमंत्री ने जारी किए आंकड़े
केजरीवाल सरकार के शासनकाल में 20,000 क्लास रूम बनाने का लक्ष्य। इनमें से 8,000 तैयार व 12,000 निर्माणाधीन। 25 नए स्कूल बने और 30 निर्माणाधीन। 6 एक्सीलेंस स्कूल, 5 नए प्रतिभा विद्यालय बने। सभी कक्षाओं में लगे ग्रीन बोर्ड और 7.5 लाख नए डेस्क।
दूसरे राज्यों समेत एमसीडी के साथ तुलना
. हरियाणा में 2015-2018 में 208 सरकारी स्कूलों व राजस्थान मेें 4,000 स्कूल बंद।
. पंजाब में 217 सरकारी स्कूल बीते तीन साल में बंद।
. उत्तर प्रदेश के करीब 1.13 लाख प्राथमिक स्कूलों में से 40 फीसदी स्कूल बिना बिजली के।
. नौ साल में एमसीडी के 109 स्कूल हुए बंद। 2011-12 में 1764 स्कूल थे, जो 2019-20 में 1655 रह गए।