यह अमर उजाला की खबर का असर है। सर गंगा राम अस्पताल के चेयरमैन डीएस राणा ने अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद मरीज केशव कालरा के इलाज के लिए गए पैसे लौटाने का आदेश दे दिया। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि डीएस राणा ने यह कदम मानवीय आधार पर उठाया है, लेकिन इसी के साथ गंगाराम अस्पताल ने केशव के इलाज में आने वाले खर्च का बिल दिल्ली सरकार को भेजने का निर्णय लिया है। अस्पताल ने यह कदम दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन और और डॉ. आरएन दास के आश्वासन के बाद उठाया है।
क्या है मामला
केशव कालरा 18 साल के छात्र हैं। 28 जुलाई को सायं चार बजे दिल्ली के दिलशाद गार्डन में केशव कालरा कार दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इसके बाद पुलिस उन्हें पास के गुरु तेगबहादुर अस्पताल ले गई। कालरा को उनके परिजन सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर भी ले गए। इसके बाद परमानंद सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल भी ले जाए गए और अंत में वह दुर्घटना के करीब दस घंटे बाद 28 जुलाई 2019 को डेढ़ बजे सर गंगाराम अस्पताल लाकर भर्ती कराए गए।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज के परिजनों ने केशव कालरा के इलाज का खर्चा देने पर अपनी रजामंदी जताई। उन्होंने प्रतिमाह 18 हजार रुपये की आमदनी बताते हुए खुद को आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के दायरे से बाहर बताया। इलाज के लिए पैसा भी देना शुरू कर दिया।
अग्रिम भुगतान के तौर एक लाख 70 हजार रुपये जमा भी करा दिया और अस्पताल में केशव कालरा का इलाज पिछले 16 दिन से चल रहा है। इस तरह से 14 अगस्त तक केशव कालरा के इलाज का खर्च करीब आठ लाख 77 हजार रुपये आया है। परिजन 2 लाख 27 हजार रुपये का भुगतान कर चुके हैं और अस्पताल के अनुसार छह लाख 50 हजार इकत्तीस रुपये बकाया है।
कहां फंस गया पेंच
दिल्ली सरकार ने 30 जुलाई को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में एक बैठक की थी। इसमें सभी अस्पतालों के प्रतिनिधि थे। सर गंगाराम अस्पताल से डॉ. वरुण प्रकाश ने हिस्सा लिया था। इसमें सीएम केजरीवाल ने कहा कि सभी निजी अस्पताल दिल्ली के भीतर दुर्घटना के शिकार, आग से जले और तेजाब आदि से जले मरीजों का मुफ्त इलाज करेंगे। इसका खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी।
कालरा का परिवार दिल्ली सरकार की इस घोषणा का लाभ लेना चाहता था, लेकिन सर गंगाराम अस्पताल केशव कालरा को यह सुविधा देने से कतरा रहा था। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर पर अस्पताल की प्रतिक्रिया भी आई और अंत में सर गंगा राम अस्पताल ने मरीज के बिल को दिल्ली सरकार को भेजने पर सहमति जताई। हालांकि इस मामले में अस्पताल के अधिकारी आधिकारिक बयान देने से बचते रहे।