नई दिल्ली। दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान 'श्रीराम' नृत्य-नाटिका इस वर्ष अपने पारंपरिक स्वरूप में लौट रही है। करीब 25 साल बाद यह प्रस्तुति 11 अक्तूबर से एक नवंबर तक मंडी हाउस स्थित खुले रंगमंच में प्रतिदिन शाम को मंचित होगी।
आधुनिक तकनीक के बजाय पारंपरिक सौंदर्य पर जोर दिया जाएगा। हस्तनिर्मित सेट, नए परिधान और शास्त्रीय मंच व प्रकाश व्यवस्था तैयार की गई है। रामचरितमानस की मूल चौपाइयों को फिर से शामिल किया गया है। प्रधान कोरियोग्राफर शशिधरन नायर और सहयोगी कोरियोग्राफर राजकुमार शर्मा मंचन का नेतृत्व कर रहे हैं। शोभा दीपक सिंह के अनुसार, पारंपरिक स्वरूप में लौटने का उद्देश्य प्रस्तुति की मूल दृश्य भाषा, संगीत और रामचरितमानस की पंक्तियों से फिर जुड़ना है, जिन्होंने इसे विशिष्ट पहचान दी है। इस नृत्य-नाटिका की परिकल्पना 1957 में श्रीराम भारतीय कला केंद्र ने की थी। ब्यूरो