उल्लेखनीय है कि यह मामला 21 मई 2014 का है। इस मामले में महिला ने अपने ही देवर पर आरोप लगाया था कि उसने उसकी ओर मिडिल फिंगर से अभद्र इशारा किया, थप्पड़ मारा और चेहरे से गंदे इशारे किए थे। पीड़िता की शिकायत पर उसके देवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 और 323 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि इस मामले में अदालत ने आरोपी को 9 अक्तूबर 2015 को इस मामले में दोषी ठहराया था, लेकिन आरोप ने खुद बेकसूर बताते हुए सभी आरोपों का खंडन किया था और अदालत के फैसले को गलत बताते हुए चुनौती दी थी। इस मामले में पीड़िता ने संपत्ति विवाद के चलते इस घटना को अंजाम देने का आरोप भी लगाया था, लेकिन इस आरोप के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य या सत्यता की कमी के चलते अदालत ने इस आरोप को खारिज कर दिया था।