वहीं, फरीदाबाद की दुकानों की खाक छानने के बाद, दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम आ पहुंचे वैभव शर्मा ने बताया, कि उन्होंने फरीदाबाद की तमाम दुकानों और शोरूमों में पता किया, लेकिन उन्हें निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला। अब अंत में उन्होंने दिल्ली की दुकानों पर इंडक्शन तलाशना शुरू किया, लेकिन हालात यहां भी एक जैसे ही दिखे। इन्फ्रारेड इंडक्शन मानों मिस्टर इंडिया हो गया है। चर्चा में है, लेकिन आंखों से ओझल।
90 प्रतिशत इंडक्शन बाजार से गायब
गैस की कमी से जूझ रहे लोगों ने विकल्प के तौर पर, जब इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख किया, लेकिन बाजार में उनकी उपलब्धता भी लगभग समाप्त हो गई है। शहर के विभिन्न इलाकों में किए गए सर्वे में सामने आया कि अधिकतर दुकानों पर इंडक्शन चूल्हे पूरी तरह आउट ऑफ स्टॉक हैं। करीब 14 दुकानों का दौरा किया गया, जिनमें छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स विक्रेता से लेकर बड़े ब्रांड स्टोर तक शामिल हैं। हर जगह एक ही स्थिति देखने को मिली “स्टॉक खत्म है।” विजय सेल्स, पिजन स्टोर और प्रेस्टीज स्टोर जैसे प्रमुख स्टोर्स पर भी इंडक्शन चूल्हे उपलब्ध नहीं हैं। दुकानदारों के अनुसार नया स्टॉक आने में कम से कम 10 से 15 दिन का समय लग सकता है।
व्यापारियों के अनुसार वर्तमान में करीब 90 प्रतिशत इंडक्शन चूल्हे बाजार से गायब हैं। जो सीमित स्टॉक उपलब्ध है, उसमें अधिकांश सामान्य (बेसिक) मॉडल हैं, जिनकी क्षमता और उपयोग सीमित है। इन्फ्रारेड इंडक्शन चूल्हों की संख्या बेहद कम है और उनकी कीमत अधिक होने के कारण आम ग्राहकों की पहुंच से बाहर है। दरियागंज, चांदनी चौक, क्नॉट प्लेस, लक्ष्मी नगर, नेहरु प्लेस, करोल बाग और सदर बाजार से लेकर आईएनए तक इन्फ्रारेड इंडक्शन आउट-ऑफ-स्टोक हैं। वहीं, कुछ दुकानों पर इंडक्शन मिल रहे हैं, लेकिन सामान्य वाले, जिससे ग्राहक काफी परेशान हैं।
चांदनी चौक में धड़ल्ले से बिक रहे लोकल इंडक्शन
वहीं, चांदनी चौक बाजार जाने पर पता चला, कि वहां तो हर कंपनी के इंडक्शन मौजूद हैं। आपको सिर्फ कंपनी का नाम बताना है, और दुकानदार आपको उसी कंपनी का नाम इंडक्शन पर प्रिंट करके दे देगा। वहीं, इस पर एक साल की वारंटी भी मिलेगी, लेकिन सिर्फ उसी दुकान पर मान्य होगी। वहीं पूरी चांदनी चौक में एक सरदार जी की दुकान दिखी, जहां वास्तविक कंपनी के इन्फ्रारेड इंडक्शन मिल रहे थे। लेकिन सरदार जी आपदा में अवसर खोजते हुए, इसे कीमत से ज्यादा दामों में बेच रहे थे। उनके पास बजाज और हैवेल्स के इन्फ्रारेड इंडक्शन चार हजार की कीमतों पर बिक रहे थे। उन्होंने बताया, कि स्ट़ॉक आ नहीं रहे हैं। आमतौर पर इंडक्शन की मांग सर्दियों में बढ़ती है, इसलिए हम स्टॉक रखते हैं। लेकिन एलपीजी किल्लत के बीच गर्मियों में भी इंडक्शन खूब बिक रहे हैं।
सामान्य और इन्फ्रारेड इंडक्शन में अंतर
ग्राहकों के मुताबिक, सामान्य इंडक्शन चूल्हे केवल मैग्नेटिक बेस वाले बर्तनों पर काम करते हैं और उपयोग की सीमाएं हैं। वहीं इन्फ्रारेड इंडक्शन चूल्हे किसी भी प्रकार के बर्तन में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें हीटिंग तेज होती है। वहीं हीट को नियंत्रण करने के लिए इसमें एक गोल घूमने वाला स्विच होता है। जहां सामान्य इंडक्शन 1200 वाट के होते हैं, वहीं इन्फ्रारेड इंडक्शन 2200 वाट में आता है। हालांकि बिजली की खपत अधिक होती है। लेकिन एलपीजी किल्लत के बीच 3 से अधिक सदस्यों वाले परिवारों के लिए यह विकल्प अच्छा माना जा रहा है।
ग्राहकों की बढ़ी परेशानी
गृहिणी रीना ने बताया, गैस खत्म होने के बाद इंडक्शन खरीदने निकले थे, लेकिन हर दुकान पर निराशा ही मिली। वहीं, दरियागंज स्थित विजय सेल्स में इंडक्शन खरीदने आए नौकरीपेशा अमित का कहना है, तीन-चार दुकानों में गया, लेकिन कहीं भी इंडक्शन उपलब्ध नहीं है। अब समझ नहीं आ रहा खाना कैसे बनेगा। वहीं, दुकानदार परविंदर ने बताया, कि एलपीजी किल्लत के चलते इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। जो स्टॉक पहले कई हफ्तों तक चलता था, वह अब कुछ ही दिनों में खत्म हो जा रहा है।